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महंगाई की विदाई

महंगाई की विदाईड्ढr आतंक, राजनीति और महंगाई,ड्ढr इसने सारी जनता को चपत लगाई बनाई।ड्ढr अब आ गया है समय मेर भाई,ड्ढr चलो मिलकर करं, इन सबकी विदाई।।ड्ढr पूर्णिमा छात्रों को ठगते संस्थानड्ढr आईआईएम के फीस बढ़ाने पर खासा हंगामा हो जाता है। जबकि सच यह है कि आईआईएम और आईआईटी के पास अच्छा खासा इन्फ्रास्ट्रक्चर है। पढ़ने-पढ़ाने पर भी वे खासा खर्च करते हैं, लेकिन उन अटपटे नामों वाले स्वनाम धन्य संस्थानों के बार में कोई नहीं बोलता, जो सिर्फ छात्रों को ठगते हैं। ये अथाह फीस बटोरते हैं और इन्फ्रास्ट्रक्चर के नाम पर इनके पास कुछ भी नहीं।ड्ढr श्वेता अहूाा, देहरादूनड्ढr चुनावी सरगर्मी परिसर तक रहेड्ढr काशी विद्यापीठ के छात्र जिस तरह से छात्र संघ के चुनाव के लिए प्रचार कर रहे हैं वह काफी शर्मनाक है। वह वारणसी में आने वाले पर्यटकों पर भी बुरा असर डालता है। यहां गलियों सड॥कों की हर दीवार, हर ऑटो सब पर टिंकू, पिंकू वगैरह को वोट देने की अपील छपी हुई है। अच्छा यह होगा कि चुनाव और उसके प्रचार को परिसर तक ही सीमित रखा जाए। विश्वविद्यालय और शहर प्रशासन को इसके लिए कुछ करना चाहिए।ड्ढr अमिताभ केडिया, वाराणसीड्ढr तेल पर फिसलती सरकारड्ढr हर कोई तेल के पीछे हाथ धोकर पड़ा है। सरकार तो तेल पर फिसल ही रही है। वामदलों की मेहरबानी से सरकार मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के हाथ से निकल रही है। और देश के नेता, नौकरशाह सब तेल की चिंता में दिन भर अपनी बड़ी-बड़ी गाड़ियां दौड़ाते हैं, एसी कमरों में बैठकर मीटिंग करते हैं। पर समस्या नहीं सुलझ रही।ड्ढr फं्नी२ँ३८ं्र31१ी्िरऋऋं्र’.ूड्ढr ओशो की गलतबयानीड्ढr अनहद में छपा ओशो का यह कथन गलत है कि मोहम्मद ने किसी स्त्री को मसिद में आने की क्षाजत नहीं दी। लगता है लेखक को इस्लाम का कतई कोई ज्ञान नहीं। मुस्लिम स्त्रियां हारत मोहम्मद साहब के समय मसिद में खूब आती थीं। वे नमाज भी उनके पीछे पढ़ती थीं। हारत उमर की खिलाफत के दौरान कुछ लोग मसिद में आकर स्त्रियों को तंग करने लगे तो उन्होंने कहा कि बेहतर है कि स्त्रियां घर में ही इबाबत करं। उन्होंने भी स्त्रियों को मसिद में आने से मना नहीं किया। दक्षिण भारत और विदेशों की मसिदों में औरतों के लिए एक पूरा अलग हिस्सा हेाता है जहां वे इबाबत करती हैं। हा के दौरान पूरी दुनिया से आए मर्द और औरतें एक साथ मक्का में इबाबत करते हैं।ड्ढr मो. अमीरुल, काशीपुर, समस्तीपुरड्ढr सरबजीत को मुक्ित क्यों नहींड्ढr पाकिस्तान में बंद सरबजीत सिंह की बेगुनाही सामने आने के बावजूद उसको रिहा न किया जाना दुखद है। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग के सदस्य अंसार बर्नी भी मान चुके हैं कि सरबजीत का मामला गलत पहचान का है। जिस गवाह की गवाही के आधार पर सरबजीत को बम विस्फोट मामले में कैद किया गया उसने भी सरबजीत को पहचानने से इनकार कर दिया। बर्नी ने सरबजीत के परिवार और भारतीय लोगों को एक आशा की किरण दिखाई थी। इससे पहले भी वे कश्मीर सिंह की रिहाई में अहम भूमिका निभा चुके हैं, लेकिन लगता है पाक सरबजीत को छोड़ने की एवज में अपने कुछ लोगों को छुड़वाना चाहता है। इसलिए सरबजीत को छोड़ने में आनाकानी कर रहा है।ड्ढr शशि प्रकाश पांडे, सेक्टर-32, चंडीगढ़

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