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कस्बे का भगीरथ

वे असीम प्यास के धनी थे। हमेशा अंजुरी फैलाए मिलते। घाट-घाट का पानी पी चुके थे, तब भी जहां कहीं दो चुल्लू दिख जाता, वहीं मुंह बा देते। समदर्शी इतने कि गटर के पानी और बिसलेरी वाटर की बोतल, दोनों ही पर बराबर की निगाह रखते। द्रवित होना ता कोई उनसे सीखे। जब जिस दल की सरकार होती, वे उसी खेम की ओर बह जाते। उनका मानना था- इस दुनिया में मूरख ही प्यासे रहते हैं। ज्ञानी वह होता है, जो रेगिस्तान के बीच में खड़ा होकर भी अपनी खातिर नखलिस्तान की तलाश कर ले।स्वभाव भी उनका जल जैसा ही निर्मल था। जब जिस पात्र में रहे, वैसा ही आकार ग्रहण किया।ड्ढr ड्ढr तालाब, बावड़ी या कुएं के पानी जैसा ठहराव उन्हें कतई नापसंद था। वे नहर के पानी की तरह निरंतर बहते रहन के हिमायती थे। हालांकि वे इस तथ्य से भलीभांति अवगत थे कि नहर में जरूरत के वक्त ही पानी छोड़ा जाता है। वक्त-जरूरत अपनी आंखों में पानी भर लेन की कला ता कोई उनसे सीखे। उन्हें नाली के पानी की तरह बहने से भी कोई गुरेज नहीं था, बशर्ते इसमें निजी लाभ की संभावना दिखलाई पड़ती हो। दूसरों को पानी पर चढ़ाने और स्वयं बहती गंगा में हाथ धोने में वे सिद्धहस्त थे। वे नदी के तट पर खड़े हो जाते तो किनारे भी दो सेंटीमीटर अंदर सरक लेते। फिर भी वे लहर गिनकर पैसा कमाना जानते थे। लहर उठे, न उठे, उन्हें पैदा करन की विधि ज्ञात थी। चुनाव वगैरह के टाइम में तो खैर, लहर अपने पक्ष में करन के वे उस्ताद ही हुआ करते। उनकी गिनती इलाके के पानीदार लोगों में होती। उन्हें कई बार ‘पानी बचाओ’ मुहिम की अगुआई करते हुए भी देखा गया था। इसीलिए जब मेरे कस्बे में भी पानी की समस्या ने विकराल स्वरूप प्राप्त कर लिया तो जनता को सर्वप्रथम उन्हीं की याद आई। उन्होंने जब यह बात जानी तो अंदर तक गीले हो उठे। जल संकट का निदान करने से कितना पुण्य लाभ होगा, उन्होंने तत्काल इसका जोड़-घटाना करके देखा। यह तो पीढ़ियों को तारन का काम है। सूखे में नाव चलान की उनकी बरसों की अतृप्त इच्छा कंठ मार्ग से बाहर फूट पड़ी। उन्होंने अपनी वाणी के प्रवाह को और अधिक तीव्र करते हुए कहा- ‘आज से मैं बनूंगा इस कस्ब का भगीरथ।’ उनका निजी प्रयत्न रंग लाया। आज कस्ब की मेन मार्केट में उनकी हैंडपंप की होलसेल एजेंसी है। आगे अगर उनके विरोधियों ने किए-कराए पर पानी नहीं फेरा ता कस्बे के लिए प्रस्तावित पानी की टंकी के निर्माण का ठेका भी कल को उन्हीं के पास होगा।

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  • Web Title: कस्बे का भगीरथ