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मानेकशॉ मामले में एंटनी को झटका

ील्ड मार्शल मानेकशॉ के राजकीय अंतिम संस्कार में रक्षा मंत्री और सेना के तीनों अध्यक्षों के उपस्थित न होने पर मीडिया में हुई आलोचना से रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी की छवि को काफी धक्का लगा है। वह इससे काफी आहत हैं। सूत्रों के मुताबिक फील्ड मार्शल के पद को लेकर सरकार में आर्डर आफ प्रेसिडेंस यानी वरीयता क्रम न होने के कारम भ्रम बना रहा। आश्चर्य की बात तो यह है कि 1में जनरल मानेकशॉ को फील्ड मार्शल बनाए के बाद से अब तक कई सरकारें आईं और गईं लेकिन किसी ने भी इस पद के वरीयता क्रम या प्रोटोकॉल पर कोई ध्यान नहीं दिया। यह काम गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी है लेकिन मानेकशॉ के निधन के बाद ही रक्षा मंत्रालय की पहल और पीएमओ के निर्देश पर उनकी राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि करने का निर्णय लिया गया। अंत्येष्टि में रक्षा मंत्री की बजाय रक्षा राज्यमंत्री पल्लमराजू को वेलिंगटन भेजने के फैसले पर विभिन्न सूत्रों ने अलग-अलग जानकारी दी है। एक सूत्र का कहना है कि प्रोटोकॉल के अभाव में यह तय नहीं किया जा सका कि रक्षा मंत्री स्वयं जाएं या अपने जूनियर मंत्री को भेजें। यदि एसा था तो भी रक्षा मंत्री को चले जाना चाहिए था क्योंकि प्रोटोकॉल के अभाव में इसके टूटने का कोई सवाल ही नहीं था। पता चला है कि भ्रम की इसी स्थिति के बीच रक्षा मंत्री के विमान से पल्लमराजू को रवाना कर दिया गया। उसी विमान से नौसेना अध्यक्ष एडमिरल सुरीश मेहता और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एफ.एच.मेजर भी जा सकते थे लेकिन इन दोनों को रक्षा राज्य मंत्री की रवानगी की सूचना विमान रवाना होने के 20 मिनट बाद लगी। कोई तो वजह थी कि न तो रक्षा मंत्री गए और न ही सेनाओं के प्रमुख। थलसेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर 27 जून को अंत्येष्टि के दिन रूस में थे लेकिन बाकी लोगों के न जाने की वजह अब भी रहस्य है।ड्ढr

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  • Web Title: मानेकशॉ मामले में एंटनी को झटका