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गांव-शहर की सैर पर आये ‘ड्रैगन’

रांची से लगभग 20 किलोमीटर दूर खिजुरटोला के ग्रामीणों द्वारा पकड़ा गया एक ड्रैगन इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। गांव के लोगों ने इसे रस्सी से बांध कर रखा है। लगभग चार फीट का यह ड्रैगन मेंढ़क और कीत-पतंगे खाकर जीवित है। तेज फुंफकार के साथ यह अपनी लंबी दोमुंही जीभ बाहर निकालता है। ग्रामीणों ने ड्रैगन के पकड़े जाने की जानकारी वन विभाग के अधिकारियों को भी दी है। परंतु विभाग के अधिकारियों की तरफ से किसी प्रकार की पहल नहीं की गयी है।ड्ढr जीव जंतु और पर्यावरण संबंधी जानकार डॉ नितिश प्रियदर्शी बताते हैं कि इसका साइंटिफिक नाम कोमोडोर ड्रैगन है। झारखंड के कुछ इलाकों में इसे देखा गया है। परंतु अब इस प्रकार के जीव लगभग विलुप्त हो गये हैं। इस प्रजाति का ड्रैगन इंडोनेशिया और आस-पास के देशों में पाया जाता है। यह प्राणी रप्टाइल वर्ग से है और इसे डायनोसोर और छिपकिली के बीच की कड़ी माना जा सकता है। डायनोसोर के विलुप्त होने और नये जीव की उत्पत्ति पर शोध कर रहे लोगों को इसके अध्ययन में मदद मिल सकती है।ड्ढr उधर हाारीबाग में तीस जून को इसी वर्ग का एक प्राणी वेरनस हरनगंज निवासी रांीत सनकर के आवास में पाया गया। दुर्लभ जीवों के संरक्षण की कवायद में लगे नियो ह्यूमैन फाउंडेशन के सत्यप्रकाश के अनुसार यह सरीसृप वर्ग का दुर्लभ प्राणी है।

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