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मास्साब..,इत्ती गंदगी में पढ़ाओगे हमें?

पहलीोुलाई से स्कूल तो खुल गए लेकिन बहुत से सरकारी स्कूलों की दशा इस लायक नहीं कि वहाँ पढ़ाई तो दूर बैठना भी मुश्किल है। आलम यह मिला कि किसी स्कूल में मादूरों का ताला पड़ा है तो कोई बीते डेढ़ महीने में ठेकेदारों का गोदाम बन गए हैं। कई स्कूलों के कमरे, टॉयलेट व गोबर की गंदगी से सड़ांध मार रहे हैं तो किन्हीं स्कूलों का ताला तो खुला पर शिक्षक नदारद। एकोुलाई तक स्कूलों को साफ-सुथरा कर बच्चों के पढ़ने लायक बनाने के सारे सरकारी निर्देश बेमानी साबित हुए। ‘हिन्दुस्तान’ ने मंगलवार को नगर क्षेत्र के कुछ स्कूलों का मौका-मुआयना किया, हाल कुछ इस तरह मिला।ड्ढr प्राथमिक स्कूल, तोंदे खेड़ा-मुख्य गेट से लेकर अन्दर सभी कमरों के दरवाो खुले थे लेकिन अन्दर न कोई बच्चा था न मास्टर साहब। बरामदे से लेकर तीनों कमरों में गोबर व मानव मल ही पड़ा था। इतनी दुर्गन्ध थी कि अन्दर घुसना मुश्किल। सूचना पाकर थोड़ी देर बाद पहुँचे सहायक अध्यापक नरन्द्र कुमार रुमाल से नाक-मुँह बंदकर कमर में घुसे। फिर कहते हैं कि यह देखिए मोहल्ले वाले इसी में शौच करते हैं। आए दिन ताले तोड़ देते हैं। अब ताला लगवाना ही छोड़ दिया है। गंदगी की वाह से ही बच्चे स्कूल नहीं आए। प्रधानाध्यापक नन्द किशोर यादव व शिक्षा मित्र साढ़े नौ बो तक स्कूल नहीं पहुँचे। लोगों ने आरोप लगाया कि शिक्षा मित्र क्षेत्रीय पार्षद की भतीाी है, वह कभी स्कूल नहीं आतीं।ड्ढr प्राइमरी स्कूल अम्बेडकरनगर- यहाँ के तीन कमरों को सड़क बनवाने वाले ठेकेदारों ने स्टोर बना रखा है। कमरों में सीमेंट, फावड़े, सरिया व पाइप भर हैं। दो साल पहले बने इस स्कूल की दीवार दरक गई है। कमर-बरामदे गोबर व गंदगी से पटे पड़े मिले।ोगह-ागह लकड़ी के चूल्हे और राख पड़ी थी। पाँच छह बच्चे स्कूल आए लेकिन गंदगी देख वापस लौट गए। दोनों शिक्षा मित्र भी स्कूल नहीं आए।ड्ढr ाूनियर हाईस्कूल अम्बेडकरनगर-यहाँ के दो कमरों में मादूर रहते हैं। लगभग पौने 10 बो मादूर कमरों में बैठे खाना खा रहे थे। खाना बनाने के बर्तन, गैस सिलेण्डर, कपड़े सब कमर में बिखर थे। एक कमर में अकेली बैठी शिक्षिका बोली आप लोग ही कुछ कराइए। इन लोगों ने स्कूल पर कबा कर लिया है। बच्चे कहाँ पढ़ेंगे। बरामदे में ठेकेदार ने सामान लगा रखा है। ठीक एक वर्ष पहले बने इस विद्यालय की फर्श पूरी तरह टूट गई। कमरों में दरार पड़ गई।ड्ढr प्राइमरी स्कूल औरंगाबाद- इस विद्यालय के निर्माण में भवन प्रभारी व शंकुल प्रभारी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। नतीाा बरसात में छत का पूरा पानी कमर में ही टपकता है। स्कूल में बिना कॉपी-किताब व बैग के आठ बच्चे बैठे मिले।ड्ढr ाूनियर हाईस्कूल औरंगाबाद-लगभग 25 बच्चे सुबह स्कूल आए, खुद वहाँ की सफाई की। उसे बैठने लायक बनाया। इस स्कूल में कक्षा छह, सात व आठ कक्षा को पढ़ाने के लिए केवल एक शिक्षक हैोबकि बच्चों की संख्या सौ से अधिक है। प्राइमरी स्कूल किला मोहम्मदीनगर- बाहर भी काफी गंदगी थी। पहले दिन स्कूल में केवल तीन बच्चे ही आए। इंचरा के मुताबिक लोग समय से आ गए लेकिन बच्चे ही नहीं आए।

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