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छह जुलाईसे पहले समर्थन वापसी!

भारत-अमेरिका परमाणु करार पर अपना तेवर और सख्त करते हुए वामपंथी पार्टियों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 6 जुलाई को जी-आठ की शिखर बैठक के लिए रवाना होने से पहले ही कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार से समर्थन वापस ले लेने का संकेत दिया है। वाम सूत्रों ने मंगलवार को कहा कि भारत केन्द्रित परमाणु सुरक्षा उपायों पर आईएईए में प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से वार्ताकारों को वियना भेजे जाने के अगले दिन यानि पांच जुलाई को ही समर्थन वापसी का फैसला ले लिए जाने की संभावना है।ड्ढr ड्ढr सूत्रों ने कहा कि अब यह प्रधानमंत्री पर निर्भर करता है कि वह बहुमत प्राप्त सरकार के मुखिया के तौर पर जापान जाते हैं या अल्पमत सरकार के प्रमुख के रूप में। चार जुलाई को इस मुद्दे पर चारों वामपंथी पार्टियों की एक संयुक्त बैठक भी हो रही है। प्रधानमंत्री क आईएईए और एनएसजी स हुई बातचीत क नतीजों को संसद मं पश करन क बयान क बाद माकपा न कहा है कि करार पर आग बढ़ना संसद का अपमान हागा। उधर आईएईए के संचालन मंडल की बैठक सात जुलाई को हो रही है और करार के बारे में फैसला आने वाले सात दिन में होने की संभावना है। आईएईए के प्रवक्ता ने विएना से टेलीफोन पर बातचीत में संचालन मंडल की बैठक सात जुलाई को होने की पुष्टि करते हुए कहा कि एजेंसी के बजट एवं प्रबंधन संबंधी मुद्दों पर यह बैठक हो रही है। लेकिन प्रवक्ता ने इस सवाल का जवाब देने से इंकार कर दिया कि यदि भारत इस बैठक के दौरान परमाणु निगरानी समझौते पर हस्ताक्षर करना चाहे तो यह तकनीकी रूप से सम्भव है या नहीं। यदि संप्रग सरकार समाजवादी पार्टी का समर्थन हासिल करने में कामयाब हो जाती है तो पूरी सम्भावना है कि आईएईए में सात जुलाई को भारत कोई ठोस फैसला कर लेगा।ड्ढr ड्ढr इस बीच घरेलू मोर्चे पर आने वाले सात दिन उथलपुथल भरे हैं। यूएनपीए की बैठक तीन जुलाई को रही है जिसमें समाजवादी पार्टी का रुख सामने आएगा। मनमोहन सिंह सरकार की निगाहे इस फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि वाम दलों के समर्थन वापस लेने के स्थिति में मुलायम सिंह की पार्टी सरकार की नैया को तिनके का सहारा दे सकती है। जी-8 की बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश के बीच मुलाकात में परमाणु समझौते के मुद्दे पर भारत का रुख सामने आएगा। कांग्रेस और सपा के बीच दूरी घटीड्ढr नई दिल्ली (एजेंसियां)। लोकसभा में 3सांसदों वाली समाजवादी पार्टी के परमाणु करार पर कांग्रेस का साथ देने के संकेत के बीच परमाणु समझौते के तमाम पहलुओं की जानकारी देने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम के नारायणन बुधवार को सपा नेतृत्व के साथ बैठक करने जा रहे हैं। सपा महासचिव अमर सिंह ने मंगलवार को माकपा महासचिव प्रकाश करात से मुलाकात के बाद संवाददाताओं को यह जानकारी दी। हालांकि उन्होंने साफ किया कि करार पर संसद के भीतर बाहर अपनाए गए उसके रुख में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है। उधर करार पर सरकार और वाम दलों के बीच जारी टकराव के बीच रल मंत्री लालू प्रसाद ने मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। दस जनपथ के बाहर प्रतिक्षा कर रहे पत्रकारों को लालू प्रसाद ने श्रीमती गांधी के साथ अपने इस संक्षिप्त भेंट बार में कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। हालांकि इस मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि चर्चा है कि रल मंत्री समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह के संपर्क में हैं। दूसरी ओर अमर सिंह ने कहा कि केन्द्र सरकार अगर करार पर कोई नया तथ्य रखती है तो वह इसे वाम दलों तथा संयुक्त राष्ट्रीय प्रगतिशील गठबंधन के अपने साथियों के समक्ष भी रखेंगे। सिंह ने कहा कि करार के बारे में अभी तक हमें जो भी सूचना मिली है वह वाम दलों के नेताओं से ही मिलती रही है और हमारा रुख उसी पर आधारित है। विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी की सोमवार की रात सिंह से मुलाकात हुई थी और समझा जाता है कि सपा नेतृत्व के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की बैठक का फैसला उसी दौरान हुआ। सपा नेता ने कहा कि अगर सरकार इस समझौते के बारे में कुछ नई जानकारियां देती हैं तो उनकी पार्टी उस आधार पर अपने निर्णय लेगी। करात से मुलाकात के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा-मैंने कामरेड करात से अनुरोध किया है कि धर्मनिरपेक्ष ताकतों का एकजुट रहना बहुत जरूरी है, क्योंकि उनमें फूट पड़ने से सांप्रदायिक ताकतों को ही फायदा होगा। अमर सिंह ने अमेरिका यात्रा से लौटने के बाद पत्रकारों से कहा कि राष्ट्रीय हित राजनीति का मसला नहीं है। राजनीति में जिद पर अड़े रहना ठीक नहीं। सपा देखेगी कि वर्तमान राजनीतिक गतिरोध को खत्म कैसे किया जा सकता है। यूएनपीए की महत्वपूर्ण बैठक 3 जुलाई को हो रही है और उससे एक दिन पहले नारायणन की सपा नेताओं के साथ होने वाली बैठक से यूएनपीए के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लग सकता है। कांग्रेस से सपा की नजदीकी बढ़ने के बारे में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के आरोप की ओर ध्यान दिलाए जाने पर सिंह ने कहा कि सुश्री मायावती खुद कांग्रेस की मदद लेकर सपा को खत्म करने का अभियान चलाती रही हैं।ड्ढr ड्ढr करार मुस्लिम विरोधी: मायावतीड्ढr लखनऊ (वार्ता)। केन्द्र की संप्रग सरकार से हाल में समर्थन वापस लेने के बाद उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती ने एटमी करार को मुस्लिम विरोधी बताते हुए कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सुश्री मायावती ने मंगलवार को कहा कि यह समझौता ईरान से सस्ती गैस की कीमत पर किया जा रहा है और मुसलमान इसका डटकर विरोध कर रहे हैं। आगामी लोकसभा चुनाव में बसपा के भाजपा से किसी चुनाव पूर्व तालमेल की संभावना को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस और सपा इस तरह की अफवाहें फैला रहे हैं ताकि बसपा की सर्वसमाज विचारधारा के खिलाफ मुसलमानों के दिमाग में भ्रम पैदा किया जा सके।

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