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भाजपा-चादयू के गले की हड्डी बना

ाल्गुनी-नरन्द्र प्रकरण सत्तारूढ़ भाजपा-जद यू गठबंधन के गले की हड्डी बन गया है। चुनावी तैयारियों में जुटे दोनों दलों के शीर्ष नेता ऐसा कोई भी ‘कदम’ उठाने में झिझक रहे हैं जिससे गठबंधन के रिश्ते पर प्रतिकूल असर पड़ता हो। यही वजह है कि उनके मान-मनौव्वल को कोशिशें तेज हो गई हैं। बताया जाता है कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राधामोहन सिंह ने भाजपा विधायक फाल्गुनी प्रसाद यादव से ‘कड़े’ बयान नहीं देने का आग्रह किया है। उनका तर्क है कि इससे न सिर्फ फाल्गुनी की अपनी बल्कि राजग की छवि भी खराब हो रही है।ड्ढr ड्ढr इससे पहले फाल्गुनी का पक्ष जानने के बहाने राधामोहन सिंह और जद यू विधायक ललन सिंह उनके घर जा चुके हैं। यह कवायद भी मूलत: मामले का पैचअप कराने को लेकर ही थी। छनकर आई सूचनाओं के मुताबिक दोनों अध्यक्षों ने श्री यादव को काफी पुचकारा। उनको गठबंधन धर्म का हवाला देकर आत्मदाह की धमकी वापस ले लेने का आग्रह किया गया। लेकिन फाल्गुनी ‘ठंडा’ नहीं हुए। उधर श्री यादव को भी महसूस होने लगा है कि राजनीतिक मजबूरियों के चलते राजग नेतृत्व खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री नरन्द्र सिंह पर कार्रवाई करने के मूड में नहीं है।ड्ढr ड्ढr इससे श्री यादव आहत हैं। उनकी नाराजगी खास तौर से भाजपा के प्रदेश नेतृत्व से है जिसे उनके जैसे पुराने कार्यकर्ता और विधायक के अपमान की कोई फिक्र नहीं है। श्री यादव का मानना है कि उनके मामले में जद यू कोटे के मंत्री नरन्द्र सिंह पर कार्रवाई के लिए उनके दल के प्रमुख नेता मुख्यमंत्री पर वाजिब दबाव नहीं बना पा रहे हैं। ऐसे नेतृत्व पर से उनका भरोसा उठ गया है और यही वजह है कि अब वह इस लड़ाई को सीधे मुख्यमंत्री के दरबार में ले गए हैं।

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