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अकूत संपत्ति थी अजय के पास

ईश्वर और शुभ अंकों में विश्वास रखने वाले डा. अजय कुमार सिन्हा अकूत संपत्ति के मालिक थे। इनकी तीन बहनें और उनके पति जहां दूसर राज्यों में प्रतिष्ठित सरकारी चिकित्सक हैं वहीं इनके एक भाई डा. संजय दिल्ली के प्रतिष्ठित एलजेपी अस्पताल में कार्यरत हैं। एक छोटा भाई व मां दोनों मानसिक रोगी हैं जो इनके साथ दानापुर के सरकारी बंगले में ही रहते हैं। मृतक के नजदीकी सूत्रों के अनुसार डा. अजय बिहार के ऐसे इकलौते चिकित्सक थे जिनके पास आर्थोपेडिक सह न्यूरो सर्जन की डिग्री थी। ईश्वर और शुभ अंकों पर विश्वास करने वाले इस चिकित्सक ने अपनी कार का नम्बर भी शुभ अंक (151) का लिया था।ड्ढr ड्ढr बताया जाता है कि उनकी प्रैक्िटस इतनी चलती थी कि कुछ माह पूर्व पीएमसीएच में सहायक प्रोफेसर की मिल रही नौकरी को उन्होंने तिलांजलि दे दी । मुजफ्फरपुर जिला के जटमलपुर गांव निवासी डा. अजय को अपने ननिहाल में भी काफी संपत्ति मिली थी। उस संपत्ति को वह धीर-धीर बेच रहे थे। वह शुक्रवार को आरा तथा प्रत्येक रविवार को मुजफ्फरपुर स्थित अपनी क्िलीनिक पर बैठते थे। इसके अलावा राजा बाजार में हई अस्पताल के सामने तथा किसी मरीा को आपरशन की जरूरत होने पर वह शेखपुरा स्थित रामवती नर्सिग होम में भी बैठा करते थे। चिकित्सक के घर पांच वर्षो से काम करने वाली दाई(लखनीबीघा) सरस्वती बताती है कि घर में नवजात आने की उन्हें बहुत खुशी थी तथा मैडम को जाते समय कहे थे कि सुदंर सा बेटे को साथ लाना पर हत्यारों ने उन्हें अपने नवजात का मुंह देखने के लिए जिन्दा नहीं छोड़ा। बहरहाल डा. अजय की जिसने भी हत्या की है उसने काफी दिन पूर्व से ही इसकी साजिश रच रखी होगी। क्योंकि जिस चालाकी से हत्यारों ने घटना को अंजाम दिया उससे जाहिर है हत्यारे घर के हालात और चप्पे-चप्पे की जानकारी रखते थे। कार व कुत्ता कह रहे कुछ अलग ही कहानीड्ढr विनायक विजेताड्ढr पटना । दानापुर रलवे आफिसर्स के जिस सरकारी बंगले में चिकित्सक डा. अजय कुमार सिन्हा की हत्या हुई वह काफी सुरक्षित क्षेत्र माना जाता है। किसी अपरचित को देख भौंकनेवाला उनका एलसीशियन नस्ल के खौफनाक कुत्ते की घटना के समय खामोशी और परिसर में उनकी बेतरतीब ढ़ंग से पार्किंग की गई इंडिका कार (बीआर-वन-एजे-0151) कुछ अलग ही कहानी कह रही है। परिस्थितिजन साक्ष्य से यह लगता है कि लूट के इरादे से आए हत्यारों की संख्या चार से पांच तक की रही होगी। बड़ी सहाता और आराम से चिकित्सक की हत्या करने के बाद उन्होंने घर में लूट-पाट की। घर की स्थिति देख यह कयास लगाया जा सकता है कि हत्यारों का मुख्य उद्देश्य नकदी और जेवरों को ही लूटना था। मृतक की चिकित्सक पत्नी डा. सुजाता राय को सात जुलाई को डिलेवरी होनी है। वह बीते 1ाून को अपने मायके लखनऊ चली गई थी। अब तक यही कयास लगाया जा रहा है कि चिकित्सक की हत्या में उनके कम्पाउंडर सह नौकर मंटू का हाथ है। इसे डा. अजय दो माह पूर्व ही मुजफ्फरपुर से लाए थे। खगौल थाना प्रभारी ओंकार नाथ शर्मा व शास्त्री नगर थाना प्रभारी कामोद प्रसाद के नेतृत्व में दो टीम मंटू की तलाश में मुजफ्फरपुर भेजी गई है। डाक्टर अजय की कार जिस बेतरतीब ढ़ंग से बांउड्री के अंदरुनी हिस्से में झाड़ियों के साथ खड़ी की गई है, इससे यह आशंका है कि हत्यारों ने इस कार के साथ भी छेड़छाड़ की है। सवाल यह है कि क्या हत्यारे किसी अन्य गाड़ी से थे जिन्होंने अपनी गाड़ी खडी करने के लिए अजय की कार को आगे की ओर धकेला या वह डा. अजय के साथ ही गाड़ी में आए थे। घटना के वक्त कुत्ते का नहीं भौंकना भी यह इशारा कर रहा है कि हत्यारों में क ोई इस परिवार का परिचित भी था जिसे कुत्ता पहचानता था। आखिर वह कौन था, मंटू या कोई और। डाक्टर की हत्या का साजिशकर्ता मंटू ही है या वह भी हत्यारों की साजिश का शिकार हुआ। इस सब बातों से पर्दा तभी उठेगा जब पुलिस मंटू को जिंदा ढूंढ़ निकालेगी।ं

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