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सरकार से समर्थन वापसी 6 तक !

एटमी डील पर तेवर और सख्त करते हुए वाम दलों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 6 जुलाई को जी-आठ की शिखर बैठक के लिए रवाना होने से पहले ही यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लेने का संकेत दिया है। वाम सूत्रों ने मंगलवार को कहा कि भारत केंद्रित परमाणु सुरक्षा उपायों पर आइएइए में प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से वार्ताकारों को वियना भेजे जाने के अगले दिन यानि पांच जुलाई को ही समर्थन वापसी का फैसला ले लिए जाने की पूरी संभावना है।ड्ढr सूत्रों ने कहा कि अब यह प्रधानमंत्री पर निर्भर करता है कि वह बहुमत प्राप्त सरकार के मुखिया के तौर पर जापान जाते हैं या अल्पमत सरकार के प्रमुख के रूप में। चार जुलाई को इस मुद्दे पर चारों वामपंथी पार्टियों की एक संयुक्त बैठक भी हो रही है। इस बीच सत्ता के गलियारे में सपा, मुलायम व अमर सिंह बेहद अहम हो गये हैं। पहले कांग्रेस के राजनैतिक प्रबंधक सीपीएम को मैनेज करने की जुगाड़ करते थे, लेकिन अब वे वाम द्वारा सरकार की स्थिरता को पैदा किये संकट के दौर मेंसपा और अन्य छोटे दलों को करीब लाने में जुट गये हैं। सपा के कांग्रेस खेमे में जाने से रोकने के लिए माकपा जबर्दस्त कोशिश कर रही है। मंगलवार सुबह सपा प्रमुख मुलायम ने दिल्ली पहुंचते ही पार्टी महासचिव अमर सिंह के साथ ताजा हालात पर चर्चा की तो बाद में अमर सिंह ने प्रकाश करात के साथ पौन घंटा बात की। बसपा भी अपने ढंग से मुलायम सिंह को कांग्रेस खेमे में जाने से रोकने की मनोवैज्ञानिक दबाव बना रही हैं। लखनऊ में अपने पत्रकार सम्मेलन में बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि एटमी करार से मुसलमानों में नाराजगी है। उन्होंने यह सफाई भी दी कि उनका भाजपा से कोई तालमेल नहीं। उधर, समाजवादी पार्टी का मानना है कि भाजपा और बसपा मिलकर धर्मनिरपेक्षता के लिए सबसे बड़ा खतरा हो सकते हैं। करात से मुलाकात के बाद अमर सिंह ने कहा भी कि डील से बड़ा मुद्दा सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ाई का है। लेकिन सकारात्मक बात यह कि सपा के नेता अब करार के बारीक पहलुओं को समझने की कोशिश में हैं। इस प्रक्रिया में कल अमर सिंह की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नारायणन से चर्चा होगी। लेकिन सपा का करार पर अंतिम फैसला तीन जुलाई को होगा।

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