अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

टीआरपी का खेल

हकीकत को स्पर्धा बनाकर परोसने का दावा करने वाले टेलीविजन के रिएलिटी शो का फसाना किसी अंत से पहले ही दुखांत होता जा रहा है। बांग्ला टेलीविजन चैनल के ऐसे ही रिएलिटी शो में जजों की डांट से गश खाकर गिर पड़ी टीनएजर शिंजिनी सेनगुप्ता अभी अस्पताल में उस पीड़ा से जूझ रही है। जबकि कार्यक्रम के निर्माता, निर्देशक और जज यह कहते घूम रहे हैं कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। एक तरह से यह सच भी है- बड़ों की धारणाओं, महत्वाकांक्षाओं, जुनून और यहां तक कि लालच के लिए बच्चों के इस्तेमाल को हमार यहां किसी भी तरह से गलत नहीं माना जाता। बाल मजदूरी और बाल उत्पीड़न से चुपचाप आंखे फेर लेने वाले समाज में ग्लैमर की दुनिया की यह हकीकत अपराध न मानी जाए तो हैरत कैसी। वैसे भी हमने अपनी दुनिया बच्चों के लिए बनाई ही नहीं है। बच्चों के लिए हमारी जितनी भी संस्थाएं हैं, वे किसी तरह उन्हें ठोक-पीट कर वयस्क बनाने की ही हैं- चाहे वे आज के दौर के परिवार हो या स्कूल। हम उन्हें जल्द से जल्द एक कमाऊ पूत में बदलना चाहते हैं- किसी कोचिंग इंस्टीटय़ूट में ोजकर, या क्रिकेट कैंप में या फिर रिएलिटी शो में। हम बस उन्हें वह बचपन नहीं देते, जिसमें रुझान खुद-ब-खुद बनते हैं, प्रतिभा खुद-ब-खुद निखरती है। वे खुद अपना रास्ता निकालें इसके बजाए हम उन्हें पहले से बने-बनाए रास्ते पर घसीटते हुए ले जाना चाहते हैं। शिंजिनी तो फिर 16 साल की थी, ऐसे बहुत सारे टेलीविजन कार्यक्रम हैं, जिनमें आपको इसकी आधी उम्र के बच्चे ठुमके लगाते मिल जाएंगे। अक्सर हमें यह ठुमके ही दिखाई देते हैं, उनके पीछे का वह थकाऊ रियाज नहीं, जिससे इन बच्चों को महीनों तक गुजरना पड़ता है। शिंजिनी जसा कोई बच्चा अगर किसी मौके पर इस दबाव से टूट जाता है तो हम चौंकते जरूर हैं, लेकिन बिना ठहर जिंदगी के इस रिएलिटी शो के अगले एपीसोड की तैयारी में लग जाते हैं। शिंजिनी के मामले में कार्यक्रम के लोग दोषी हो सकते हैं, लेकिन बच्चों से उनका बचपन छीनने के मामले में हम सब दोषी हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: टीआरपी का खेल