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दो टूक

झारखंड में शैक्षिक अराजकता का परिणाम शिक्षा-मंदिरों की पवित्रता पर संकट के रूप में दिखने लगा है। परीक्षाफल जानने के लिए छात्रों को लाठी का सहारा लेना पड़े, यह काफी दु:खद है। नैतिक दायित्व और कर्तव्य से विमुख हो चुके विश्वविद्यालय के कतिपय अधिकारियों की नींद भी तभी टूटती है। रिाल्ट जानने के लिए छात्रों को सड़कों पर उतरने की मजबूरी के पीछे निश्चित रूप से विवि की सुस्ती है। आखिर लेट लतीफी क्यों? उसका तो काम ही यही है। छात्रों को भी संयम से काम लेना चाहिए। शिक्षा रूपी मंदिरों की मर्यादा और पवित्रता की रक्षा उनका परम कर्तव्य है। बात उचित फोरम पर उठे, अनुशासन न टूटे, यह हर-हमेशा ध्यान में रहे।

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