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प्लीज! रोकिए ये बर्बादी

पानी की बर्बादी रोकिए, नहीं तो गर्मी में आपको बूंद-बूंद के लिए तरसना होगा। हर साल गर्मी में राजधानी की आधी आबादी को पेयजल की किल्लत से रू-ब-रू होना पड़ता है। पूर नगर निगम क्षेत्र में हर दिन किसी न किसी मोहल्ले में पानी के लिए हाहाकार मचता ही है। पानी के लिए शहर में रहने वाले गरीब परिवार अपने आसपास के निजी बोरिंग वाले घरों पर आश्रित रहते हैं। वहीं नगर निगम रोज भूगर्भ जल का दोहन कर 11.5 करोड़ लीटर पेयजल नाले में बहा देता है।ड्ढr ड्ढr नगर निगम की जलापूर्ति व्यवस्था लोगों के घरों तक पानी पहुंचाने में अक्षम है। राजधानी के ज्यादातर इलाके की जलापूर्ति की पाइप पांच से छह दशक पुरानी है। निगम क्षेत्र में जलापूर्ति पाइप की कुल लंबाई सात सौ किलोमीटर है। इसमें पांच सौ किलोमीटर पाइप जर्जर है। निगम की जलापूर्ति शाखा ने पानी की बर्बादी रोकने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाया है। प्रतिदिन राजधानी में जितने पेयजल की जरूरत है, उससे दो करोड़ लीटर अधिक निकाला जाता है। इसके बावजूद लोगों को पेयजल नहीं मिलता है। शहर के कई इलाकों में अब पाइप के अवशेष ही बचे हैं। जिन इलाकों में पेयजल की आपूर्ति होती भी है वहां जर्जर पाइप होने सेबरसात में नलों से पानी के साथ कीड़े भी निकलते हैं। बीआरोपी द्वारा निजी कंपनी से कराए गए सव्रे के मुताबिक निगम के सभी पंपों को मिलाकर रोज 2रोड़ लीटर पानी जमीन से निकाला जाता है। इसमें 17.5 करोड़ लीटर पानी लोगों के घरों तक पहुंच पाता है। बाकी 11.5 करोड़ लीटर नाले में बह जाते हैं। वर्तमान जनसंख्या के अनुसार हर दिन 27 करोड़ लीटर पानी की जरूरत है। निगम ने राजधानीवासियों को शुद्ध पानी पिलाने के नाम पर पिछले वर्ष 25 लाख के सोडियम हाइपोक्लोराइड सोल्यूशन की खरीद की थी। जर्जर पाइप होने सोल्यूशन की भी बर्बादी हो रही है।

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