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नौ सहायक वन संरक्षकों का तबादला

सरकार ने वन विभाग के नौ सहायक वन संरक्षकों (एसीएफ) का तबादला कर दिया है। पर्यावरण एवं वन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय में पदस्थापित अवधेश कुमार ओझा का तबादला मुजफ्फरपुर वन प्रमंडल में किया गया है। संजय कुमार सिन्हा को भोजपुर वन प्रमंडल से गया वन प्रमंडल, सुरन्द्र प्रसाद को पूर्णिया से नवादा, बीएनपी गुप्ता को जमुई से शोध प्रशिक्षण एवं जनसंपर्क कार्यालय पटना, अजीत कुमार सिंह को तकनीकी पदाधिकारी मुख्यालय से बांका, जेके सिंह को बांका से जमुई, आरके झा को नवादा से मुख्य वन संरक्षक कार्य नियोजन प्रशिक्षण एवं विस्तार पटना, दिवाकर प्रसाद को क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक कार्यालय मुजफ्फरपुर से बिहारशरीफड्ढr और सुधीर कुमार को वन कार्य नियोजन प्रमंडल पटना से पटना वन प्रमंडल में स्थानांतरित किया गया है।ड्ढr ड्ढr ‘पलायन संबंधी तथ्यों को छुपा रहे नीतीश’ड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। राजद और राजग से समान दूरी रखने का एलान करने वाली लोजपा को नीतीश सरकार पर हमले के लिए लालू प्रसाद की मदद लेनी पड़ रही है। बुधवार को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सत्यानन्द शर्मा ने संवाददाता सम्मेलन में रलवे के आंकड़ों का हवाला देकर कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मजदूरों के पलायन संबंधी तथ्यों को जनता से छुपा रहे हैं। एनडीए के शासन में प्रति वर्ष 1.42 लाख मजदूर बिहार से बाहर जा रहे हैं जबकि तीन साल पहले यह संख्या 1.22 लाख ही थी। डॉ. शर्मा ने लोहार समुदाय के लिए अनुसूचित जातियों के समान सुविधाओं की मांग करते हुए कहा कि एनडीए के शासन में दलितों की हालत बद से बदतर हो गयी है। उन्हें दलित और महादलित के नाम पर बांटा जा रहा है। कानून-व्यवस्था पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। अपराधी पूर्व मंत्रियों और अफसरों को खुलेआम निशाना बना रहे हैं। केन्द्र से भेजी गयी राशि का 78 प्रतिशत हिस्सा भ्रष्टाचारियों की जेब में जा रहा है।ड्ढr ड्ढr ठेकेदार को राहत नहीं दीड्ढr पटना (वि.सं.)। पटना हाईकोर्ट ने भागलपुर में सड़क निर्माण कार्य का ठीका प्राप्त करने वाले ठीकदार रमाकांत सिंह को कोई राहत नहीं दी। न्यायमूर्ति रमेश कुमार दत्ता की एकल पीठ ने ठेकेदार की अर्जी का निपटारा करते हुए कहा कि राज्य सरकार के निर्णय में हस्तक्षेप करने का कोई वैधानिक कारण नहीं है। ठीकेदार से कहा गया कि वह चाहें तो सड़क निर्माण का काम वापस लेने सम्बंधी निर्णय के विरुद्ध सक्षम न्यायालय या फिर ठीकेदारों के विवादों के निपटार के लिए गठित होने वाली ट्रिव्यूनल के समक्ष अपना पक्ष रख सकते हैं। ठीकेदार की ओर से वरीय अधिवक्ता चन्द्रशेखर ने यद्यपि इसके पूर्व अपनी दलीलों से अदालत को संतुष्ट करने की पूरी कोशिश की । उनका कहना था कि ठीकेदार की गलती के कारण सड॥क निर्माण में विलम्ब नहीं हुआ। जबकि महाधिवक्ता पी के शाही का कहना था कि करार के मुताबिक निर्धारित समय के भीतर सड़क बनाने का काम नहीं हुआ तो सरकार ने उसे वापस ले लिया। इसलिए सरकार का निर्णय सही है।

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