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नौकरों के साथ क्या हो रहा है?

देश का हालड्ढr इकोनॉमिस्ट पीएम के देश का देखो हाल, कमरतोड़ महंगाई से पूरा देश बेहाल..।ड्ढr डॉ. सीपी शर्मा नौकरों के साथ क्या हो रहा है?ड्ढr अगर दिल्ली नौकरों के अपराधों से सहमी हुई है तो हमें नौकरों के साथ होने वाले र्दुव्‍यवहारों की भी समीक्षा करनी होगी। कितने ही नौकर इस दिल्ली में हर साल गायब हो जाते हैं। उनके घर वाले गरीबी के कारण दिल्ली आकर रिपोर्ट तक दर्ज नहीं करा पाते हैं। कुछ आ भी पाते हैं तो पुलिस प्रशासन उनके अनुकूल नहीं होता। मैं एक ऐसे ही केस को जानता हूं। दिल्ली में ड्राइवरी करने वाला छत्रपाल आज तक नहीं मिला। शायद गाड़ी का मालिक बीमा की मिली राशि डकार गया है। फिर उसने ड्राइवर के बीमा कवर को उसकी पत्नी तक क्यों नहीं पहुंचाया? यही बात मानवाधिकार आयोग से भी उसके भाई ने कही और अनुसूचित जाति आयोग से भी किन्तु सबने अपना बुखार दूसरों पर डाला। यह आयोग बोझ हैं देश पर और वह बेचारी गरीब पत्नी एक बच्चे के साथ आज भी इस उम्मीद के सहार 10 वर्षो से जी रही है कि शायद वह लौट आए। गाड़ी वाले ने भी आरोप लगाया था कि वह चोर गाड़ी लेकर भाग गया, किन्तु पूरी कहानी किसी को नहीं पता, न जाने ऐसी कितनी कहानी दिल्ली में हर रो लिखी जाती हैं। अपराध तो दोनों ही जघन्य हैं।ड्ढr डॉ. राकेश सहाय, नई दिल्ली मसाला नहीं आरुषि कांडड्ढr आरुषि हत्याकांड को घटित हुए एक महीना हो चुका है और सभी टीवी न्यूज चैनल इसे एक मसालेदार समाचार के रूप में दर्शकों के सामने लगातार एसे प्रस्तुत करने में लगे हैं, जसे देश में कोई अन्य महत्वपूर्ण घटना या अपराध ही नहीं हो रहे हों। वास्तविकता यही है कि प्रतिदिन महिलाएं अपराधों का शिकार बनती हैं, पर ये घटनाएं ब्रेकिंग न्यूज नहीं बनती। अच्छा यही होगा हम सब सीबीआई को अपना काम करने दें।ड्ढr युधिष्ठिरलाल कक्कड़,गुड़गांव, हरियाणा शूरवीरों की उपेक्षाड्ढr जिस देश की संसद और सरकार अपने वीरों का यथोचित सम्मान नहीं करती, जो देश अपने वीरों की पूजा नहीं करता वह स्वयं ही अपनी गुलामी के दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर देता है। आज भी हम देश की आजादी के असली शूरवीरों की उपेक्षा करते हैं। मिलिट्री क्रास से सम्मानित फील्ड मार्शल मानेक शॉ के अंतिम संस्कार से रायसेना हिल का, कमोबेश हमारी सरकार का छिटकना उसी की कड़ी है। मात्र प्रतिरक्षा राज्यमंत्री को वैलिंग्टन भेजकर हमने अपने कत्तर्व्य की इतिश्री समझ ली।ड्ढr वीरन्द्र शर्मा, पंडारा रोड, नई दिल्ली नेता हों तो ऐसे..ड्ढr देश को नाजुक दौर से गुजरते देखा तो इस्तीफा दे दिया। बेवजह सत्ता से चिपके रहना, बढ़ती उम्र में सिर्फ सलाहकार मंडल पर निर्भर रहना। शरीर में नहीं जान, पकड़ ली कमान। भारतीय नेताओं को कोइराला से सबक लेना चाहिए। अपनी इज्जत अपने हाथों में ही होती है। एक वो थे बड़े बेआबरू होकर महलों से निकले। एक ये हैं कोइराला- जिन्होंने देश व जनहित के लिए इस्तीफा दे दिया।ड्ढr श्रीचरन, दक्षिणपुरी, नई दिल्ली जुर्माना किस पर?ड्ढr न सड़क ठीक, न चौराहे ठीकड्ढr न फुटपाथ ठीक, न सब-वे ठीकड्ढr जनता मांग रही जीवन की भीखड्ढr जुर्माना तो नेता-अफसरों पर ठीकड्ढr क्यों नहीं निकालते ऐसी लीक?ड्ढr वेद मामूरपुर, नरला, दिल्लीं

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