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और भड़का कच्चा तेल

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा बाजार में डॉलर के कमजोर होने, अमेरिका के कच्चे तेल के स्टाक में आई अप्रत्याशित कमी और अमेरिका तथा ईरान के बीच बढ़ते गतिरोध से कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग गुरुवार को और भड़क गई। कच्चे तेल के दाम छह दिन में पांचवीं बार उछलकर नई ऊंचाई पर पहुंच गए। अमेरिका में कच्चे तेल के वायदा भावों में काफी उछाल आया और भाव 145.85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गये, हालांकि बाद में इसका वायदा बुधवार के 144.32 ड ॉलर के मुकाबले 145.35 डॉलर के भाव पर टिका। लंदन के बाजार में ब्रेंट क्रूड भी जबर्दस्त मजबूती के साथ रिकॉर्ड 146.6डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ गया। कच्चे तेल के भावों को इजरायल और प्रमुख तेल उत्पादक देश ईरान के बीच जारी तनाव के मद्देनजर कीमतों के 150 डॉलर के पार चले जाने की आशंकाओं से भी काफी बल मिला। तेल के दामों में उछाल के साथ ही डॉलर की कीमत में गुरुवार को यूरो के मुकाबले पिछले दो महीने की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। यूरोपीय केन्द्रीय बैंक ने अगर ब्याज दरें बढ़ाने को हरी झंडी दी, तो डॉलर और टूट जाएगा। तेल की कीमतों में इस साल जनवरी से अब तक 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई है और डॉलर का मूल्य गिरने तथा महंगाई के मद्देनजर वायदा निवेशकों के रुख ने तेल के दाम उछालने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। अमेरिका में जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वहां कच्चे तेल के भंडार में पिछले हफ्ते अप्रत्याशित गिरावट आई है और यह 20 लाख बैरल गिरकर 2अरब रोड़ बैरल रह गया है। वहां जनवरी के बाद पहली बार भंडार 30 अरब बैरल से नीचे आया है। कच्चे तेल की कीमतों में वर्ष 2002 से अब तक सात गुना की वृद्धि हो चुकी है। पश्चिमी विश्लेषक कीमतों में इस तेजी को मुख्यत: भारत और चीन में तेल की खपत बढ़ने का नतीजा मानते हैं, मगर भारत की नजर में यह बाजार की सट्टेबाजी का परिणाम है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की टेढी नजर की वजह से भी तेल के दाम मजबूती पर हैं। अमेरिका ने कहा है कि ईरान हरमुज जलडमरू को जहाजों के लिए बंद करता है, तो वह जरूरी कदम उठाएगा।

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