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नक्सल समस्या से कठिनाई

नक्सल समस्या पर केंद्र की स्वीकारोक्ति, निदान की रणनीतिनक्सली हिंसा और ठप पड़ता विकास किसी राज्य विशेष की समस्या नहीं रही। यह सुरसा 13 राज्यों को अपना ग्रास बना चुकी है। आंध्रप्रदेश में नक्सलवाद का प्रभाव कमा है, लेकिन दूसरी ओर, बिहार, छत्तीसगढ़ और झारखंड में यह पसरता ही जा रहा है। सरकारी आंकड़े ही गवाह हैं कि छत्तीसगढ़ अगर नक्सली हिंसा के लिए अव्वल है, तो झारखंड में भौगोलिक दृष्टि नक्सलियों का फैलाव सबसे अधिक है। केंद्र सरकार भी मानने लगी है कि नक्सल समस्या कानून-व्यवस्था भर का सवाल नहीं, शोषण, सामाजिक-आर्थिक असंतुलन, शासनतंत्र की निष्क्रियता और राजनीतिक दलों का जनता से घटता सरोकार असल कारण है। इस स्वीकारोक्ति के साथ सरकार ने नक्सल समस्या से निबटने के लिए सैद्धांतिक तौर पर रणनीति और मार्गदर्शिका तैयार की है। आस जगाता यह दस्तावेज काफी कारगर हो सकता है, बशर्ते शासनतंत्र के हुक्मरान इसे पूरी निष्ठा और इच्छाशक्ति के साथ जमीनी स्तर पर लागू करं। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा तैयार इस दस्तावेज की हुबहू प्रतिलिपि यहां प्रस्तुत है:ड्ढr नक्सल प्रबंधन प्रभाग: प्रस्तावनाड्ढr प्रशासनिक और राजनैतिक संस्थाओं-संगठनों की अपर्याप्त मौजूदगी से उत्पन्न रिक्ित की स्थिति में नक्सलवादी सक्रिय होते हैं। ये स्थानीय मांगों का समर्थन करते हैं और जनता के शोषित वर्गो में व्याप्त नफरत और अन्याय का फायदा उठाते हैं और एक ऐसी वैकल्पिक शासन प्रणाली का प्रस्ताव करते हैं जिसमें बंदूकों के जरिये इन वर्गो के उत्थान का वचन दिया जाता है।ड्ढr नक्सली हिंसा आंतरिक सुरक्षा के लिए लगातार एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। यह समस्या कई राज्यों में है।देश में नक्सलवादी गतिविधियों की बढोत्तरी को रोकन के लिए सरकार इस समस्या से सुरक्षा और विकास दोनों मोर्चो पर निपटी है।ड्ढr सिंहावलोकनड्ढr वर्ष 2005 में नक्सली हिंसा की 1608 घटनाओं की तुलना में वर्ष 2006 में ऐसी 150घटनाएं हुई जो 6़15 प्रतिशत की कमी दर्शाती हैं। वर्ष 2005 में परिणामी हताहतों की संख्या 677 थी जब कि वर्ष 2006 में 678 थी। वर्ष 2006 में अकेले छत्तीसगढ में कुल घटनाओं की 47़.38 प्रतिशत घटनाएं हुई और 57़.22 प्रतिशत हताहत हुए। छत्तीसगढ में हताहतों की संख्या अधिक होन का कारण है, सलवाजुडुम-नक्सली झगड़े और सुरक्षा बलों द्वारा नक्सलियों के खिलाफ सक्रिय प्रतिरोधी अभियान चलाया जाना। वर्ष 2006 में शेष देश में समग्र नक्सली हिंसा में कमी देखी गयी। मार्च, 2007 के अंत तक, 3घटनाएं हुई जबकि पिछले वर्ष संगत अवधि के दौरान 431 घटनाएं हुई। इन घटनाओं में 20व्यक्ित मारे गए जबकि 06 में मरनेवालों की संख्या 212 थी। वर्ष 07 की घटनाओं में 44 प्रतिशत हताहत हुए सुरक्षाकर्मी। झारखंड, उड़ीसा में क्रमश: 24 और 15 प्रतिशत की बढत है। चार मार्च 07 को पूर्वी सिंहभूम, झारखंड में संसद सदस्य सुनील महतो की हत्या, 15 मार्च 07 को छत्तीसगढ के बीजापुर जिले में पुलिस शिविर पर हुए नक्सली हमले, जिसमें 55 सुरक्षा कार्मिक मारे गये थे। वर्ष 06 में देश में 12476 पुलिस थानों में से, 11 राज्यों के 3पुलिस थानों से नक्सली हिंसा की सूचना मिली है। ं

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