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राज्य में नरगा कानून नहीं कमीशन बना : नामधारी

विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी ने कहा है कि झारखंड में नरगा कानून नहीं कमीशन बन गया है। बिचौलियों ने जो चाहा वही कराया। पंचायत सेवक- बीडीओ से लेकर डीसी तक का कमीशन बंधा है। गांवों में नरगा का कड़वा सच यही है। दृष्टिहीन, अपरिपक्व तथा घुटनाटेक सरकार के कारण ही कानून धूल - धूसरित हो रही है। नरगा से तंग चुरचू प्रखंड के सुनील सोरन द्वारा देह जलाकर आत्महत्या के मामले ने सरकार को कठघर में खड़ा कर दिया है। सरकार में रत्ती भर नैतिकता है, तो नरगा पर श्वेत पत्र जारी कर।ड्ढr नामधारी कहते हैं: जहां चार सौ कार्डधारी हैं वहां जॉब नहीं है। जहां दर्जन भर लोगों को कार्ड मिला है वहां कई स्कीम हैं। एक भी जॉब कार्ड वाले को सौ दिन का काम नहीं मिला है। काम नहीं मिलने पर बेरोगारी भत्ता नहीं दिये जाते। नरगा में इस्टीमेट घोटाला हो रहा है। सरकारी दर पर दस फीट व्यास का कुंआ 300 में बनता है। लेकिन नरगा में यही कुंआ 0000 में बनता है। बीच का पैसा कमीशन में जाता है। सरकार गंभीर होती , तो डीसी की बैठक बुलकर अपनी एजेंसी से इस्टीमेट तय कराती। इससे करोड़ों रुपये बचते और कमीशन पर हद तक लगाम लगते। यहां हरक अफसर का रट बंधा है। शिकायत कोषांग की बैठक में हुआ निर्णयड्ढr

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