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चल रहा है बिगाड़ने का खेल

प्रदेश की सहकारी समितियों के साथ खेल चल रहा है। अफसरों नेोब चाहा तब समितियों को भंग कर दिया और प्रशासक बैठा दिया।ोब चाहा तब अध्यक्ष बदल दिया। यहाँ तक किोिलाधिकारी तक के आदेश को सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने नहीं माना।ड्ढr सहकारी समितियों में इस प्रकार का खेल आवासीय सहकारी समितियों से लेकर बैंकिंग सहकारी समितियों और दूसरी सेवाओं वाली लाभकारी समितियों मेंोमकर हो रहा है। समितियों के अध्यक्ष बदलने या प्रशासक बैठाने के पीछे मुख्य कारण समितियों के पदाधिकारियों द्वारा वित्तीय अनियमितता दर्शायाोाता है। यह सारा काम इतने गुपचुप तरीके से होता हैोिसकी भनक समितियों के पदाधिकारियों को नहीं लग पाती है।ड्ढr बीते तीन वर्षो में प्रदेश में आवास, दुग्ध, औद्योगिक, मत्स्य, कृषि ऋण, क्रय-विक्रय, क्रय विक्रय और हार्टीकल्चर की करीब 55 हाार सहकारी समितियाँ हैं। इन समितियों में से 22 हाार समितियाँ निलम्बित पड़ी हैं। इनमें से अधिकांश में प्रशासक तैनात कर दिए गए हैं। तकरीबन 1100 समितियों में नए पदाधिकारी तैनात कर दिए गए हैं।ड्ढr इन समितियों के पुराने अध्यक्ष उपाध्यक्ष और सचिव सब रािस्ट्रार के यहाँ से लेकरोिलाधिकारी के यहाँ तक नई कार्यसमिति के गठन का विरोध र्दा कराते रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई आा तक नहीं हुई। कानपुर रोड की एक सहकारी आवास समिति के मुखिया रह चुके आातशत्रु मिश्र का कहना है कि उनकी समिति में कब प्रशासक बैठा दिया गया उन्हें पता ही नहीं चला। वह तीन साल से माँग कर रहे कि चुनाव करायाोाए, लेकिन चुनाव नहीं हुआ। अचानक उन्हें मालूम हुआ कि उनकी समिति के चुनाव भी हो गए और नई समिति भी गठित कर दी गई है।ड्ढr सहकारी आवास समितियों के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को रोकने के लिए कई बार उच्च स्तर पर शिकायतें भी हुईं, लेकिन उन पर कोई अंकुश नहीं लगायाोा सका है। हालत यह है कि हवाई अड्डे पर कार पार्किंग करने के लिए वर्ष 2000 में एक सहकारी समिति बनाई गई।ोब समिति फायदा कमाने लगी तो इसके संस्थापक अध्यक्ष को हटा दिया गया और उनके स्थान समिति मे दूसरं पदाधिकारी बन गए हैं। समिति के पूर्व अध्यक्षोगनायक सिंह चौहान, हमने कानून का हर दरवा खटखटाया लेकिन न्याय नहीं मिला। नियमानुसार सब रािस्ट्रार स्तर पर समितियों के खिलाफ कार्रवाई होती है। रािस्ट्रार कार्रवाई को करने का आदेश देता है।ड्ढr प्रमुख सचिव सहकारिता चंद्र प्रकाश कहते हैं किोब किसी समिति की अनियमितता की शिकायत आती है तोोाँच के बाद उसे भंग कर दियाोाता है और नए सिर से चुनाव करायाोाता है।ोब तक नई समिति गठित नहीं होोाती तब तक उत्तर प्रदेश सहकारी निबंधन 1े तहत प्रशासक तैनात कर दियाोाता है। वह पता कराएँगे कि ऐसा करने में कहीं कोई अनियमितता तो नहीं बरती गई।ड्डं

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