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डेंगू सिर पर और एम्स का खून सूखा

भारत की 4 प्रतिशतोनता का ब्लड ग्रुप दुर्लभ श्रेणी का है। पूरे हिन्दुस्तान से इलाा कराने लाखों लोग एम्स के पास आते हैं। मगर एम्स के पास इस ग्रुप के कितने स्वैच्छिक रक्तदाता हैं? 100 से भी कम। डेंगू का सीान सामने है और ऐसे में रक्त की कमी गंभीर संकट की स्थिति पैदा कर सकती है। डेंगू को एकबार को छोड़ भी दें तो आपात स्थिति से निपटने के लिए एम्स के पास पर्याप्त रक्त नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए एम्स के लिए कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया है। विशेषकर कामनवेल्थ गेम्स के मद्देनार एम्स में इसके लिए कोई तैयारियां नहीं कीोा रहीं।ड्ढr खेलों के दौरान चोट या बीमारी के लिए खिलाड़ियों को दुर्लभ श्रेणी के रक्त की आवश्यकता हो सकती है। दुर्लभ रक्त समूह के लिए कार्य कर रहे स्वैच्छिक संगठन उदय फांउडेशन के अध्यक्ष राहुल वर्मा ने गत दिनों सूचना के अधिकार के अंतर्गत एम्स को याचिका देकर पूछा था कि दुर्लभ श्रेणी के उसके पास कितने रक्तदाता पांीकृत हैं? इसके उत्तर में एम्स ने बताया कि उसके पास ए बी निगेटिव के मात्र 6, ए निगेटिव के लिए 2बी निगेटिव के लिए 33 तथा ओ निगेटिव के लिए 32 रक्तदाता पांीकृत हैं।ड्ढr एम्स से पूछा गया था कि उसने अब तक कितने स्वैच्छिक रक्तदान शिविर लगाएं हैं, तो उसके उत्तर में बताया गया था कि गत वर्ष एम्स ने 8रक्तदान शिविर लगाए थे,ोिनमें मात्र 7,600 यूनिट रक्त एकत्रित हुआ। गत वर्ष रिप्लेसमेंट के लिए एम्स के पास 22,00 यूनिट खून आया था। इसका अर्थ है कि 75 प्रतिशत रक्त रोगियों के तीमारदारों ने दिया।ड्ढr डेंगू ौसी बीमारियों का सीान सामने है और इस बीमारी में ब्लड प्लेटलेट्स की कमी होोाने पर रोगी को खून चढ़ाना पड़ता है। लेकिन एम्स के पास ब्लड प्लेटलेट्स की सिर्फ 75 यूनिट ही उपलब्ध हैं। दिल्ली की आबादी को देखते हुए एम्स के पास कम से कम एक लाख दुर्लभ श्रेणी के रक्तदाता होने चाहिए।

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