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सुनिए, बोलती भी है धरती मैया

आमतौर पर धीर- गंभीर और स्थिरता की छवि रखने वाली हमारी धरती भी बोलती है। काफी तेज आवाज में। इतनी कि सुन लें तो कान के पर्दे फट जाएं। अंतरिक्ष में पृथ्वी की आवाज को पहली बार रिकार्ड करने में खगोलविदों को सफलता मिली है। पृथ्वी की यह आवाज स्पेस डाट काम पर 1 मिनट 14 सेकंड के आडियो-वीडियो फारमेट में मंगलवार को जारी कर दी गयी। इसे कोई भी सुन सकता है। खगोल शास्त्रियों का कहना है कि अगर परग्रही कहीं हैं तो पृथ्वी से संपर्क बनाने में पृथ्वी की इस अपनी आवाज की वजह से उन्हें काफी सहूलियत होगी। इस आवाज को यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के सामूहिक अभियान के तहत हासिल किया गया, जिसमें चार उपग्रहों का उपयोग किया गया।ड्ढr ड्ढr अगर वास्तव में ब्रह्मांड में कोई सुन रहा हो तो उसे आसानी से इस आवाज और आवाज के स्रेत पृथ्वी का पता लग जायेगा। पृथ्वी की यह आवाज कैसी है- तीक्ष्णता के हिसाब से वैज्ञानिक मानते हैं। आम फहम भाषा में- कान के पर्दे फाड़ देने वाली। प्रकृति में कुछ चिड़ियों की चहचहाहट, फिर सीटी बजने जैसी। पृथ्वी पर प्रयोग किए जाने वाले शक्ितशाली ध्वनि संकेतों से 10 हजार गुना ज्यादा शक्ितशाली। अगर ये आवाजें यहां तक आ जायें तो ग्रह के सार रडियो स्टेशन ठप पड़ जायें। ये ध्वनि तरंगें पृथ्वी के आयनमंडल में ही जज्ब होकर रह जाती हैं इसलिए हम तक नहीं पहुंचतीं। दरअसल वैज्ञानिक पृथ्वी के विकिरण के बार में तो 10 के दशक से ही जानते हैं।ड्ढr ड्ढr ग्रह से काफी ऊपर सौर हवाओं से आवेशित कण- कण पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र से टकराते हैं तो प्रकाश उत्पन्न होता है। इस विकिरण को अरोरल किलोमेट्रिक रडिएशन (एकेआर) के नाम से जाना जाता है। यह बहुत कुछ उस टार्च की रोशनी जैसा है जिसके ऊपर मास्क चढ़ाकर उसमें छोटा छेद कर दिया जाता है और सारी रोशनी उसी छिद्र के जरिये बाहर जाती है। पृथ्वी की ध्वनि का बहुत कुछ संबंध इस एकेआर से है। पहली बार रिकार्ड की गयी कान फाड़ देने वाली ध्वनि के अलावा बहुत हल्की आवाजें भी पृथ्वी से मिलती हैं, जो बहुत संभव है सागरों की उथल-पुथल और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न ध्वनियां हों।

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