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राजरंग

धौंसाने गये थे, लगा करंटसाहब गये तो थे धौंस जमाने, पर लग गया झटका। अधिकारी हैं, सो धौंस जमाने को अधिकार समझते हैं। पर इस बार धौंस जमाना महंगा पड़ गया। साहब जिस पर धौंस जमाने गये थे, उसका वजन इनसे ज्यादा निकला। कहानी उलटी हो गयी। साहब बिजली विभाग के अधिकारी हैं। सो करंट की तरह झटका देते रहते हैं। हाल ही में तबादला करा कर रांची आये हैं। पिस्का मोड़ इलाका देखने की जिम्मेवारी मिली। सोचा कि अपने क्षेत्र में मोटरसाइकिल का शो-रूम है। उसके मालिक को जो कहेंगे, उसे मानना ही पड़ेगा। चले गये शो-रूम। आदेश दिया कि फ्री में मोटरसाइकिल की मरम्मत करो। वहां के मालिक ने इंकार कर दिया। अधिकारी महोदय को ताव चढ़ गया। कहा कि बिजली बिल इतना बढ़ा देंगे कि भरते-भरते होश पुख्ता हो जायेगा। मालिक ने महोदय के खिलाफ थाने में रपट दर्ज करा दी और विभाग के ऊपर के अधिकरियों से शिकायत भी कर दी। महोदय का आनन-फानन में यहां से तबादला कर दिया। अब पछता रहे हैं कि ये क्या कर दिया। कहां राजधानी का मजा और कहां एक छोटे से जिला में भेज दिया। करंट मारने वाले साहब को ही करंट लग गया।

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