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मुर्गो की मीटिंगं

मुर्गो को जबसे पता चला है कि अब उनका इस्तेमाल खाने और कान पकड़कर कुकड़ू-कूं बोलने के अलावा ठगी में भी होने लगा है, तब से उनमें आक्रोश व्याप्त है। दरअसल, चिकेन कम्युनिटी में असंतोष उपजाने का पूरा श्रेय उस पेटू ठग को जाता है, जो एक मंत्री के नाम पर होटल से मंगाकर मुर्गे की टांगें तोड़ता रहा। मुर्गो की आंखों से उस ठग के लिए शोले निकल रहे थे। सामने पड़ जाता तो शायद वे उसे बिना रोस्ट किए कच्चा ही चबा जाते लेकिन लाचार थे इसीलिए उन्होंने मीटिंग रखी।ड्ढr ड्ढr मंडी के सार मुर्गे इंसानी पेटों के कब्रिस्तान में पैर लटकाए बैठे थे। उनके कई साथी पेटू ठग की वजह से अपात्र लोगों के पेट में पहुंच चुके थे। लिहाज सभी मुर्गो ने बहुमत से तय किया कि अब वे पेट में पहुंचने के बाद निट्ठल्ले नहीं बैठेंगे, बल्कि खाकर डकार लेने वाले अपने भक्षणकर्ताओं की पोल खोलेंगे। इस फैसले के चंद दिनों के अंतराल में कुछ चिकेनाइट्स की ताबड़तोड़ कई रिपोर्टे चिकेनिएट में आईं। जिनमें से प्रमुख रिपोर्टे इस प्रकार हैं :-ड्ढr ड्ढr रिपोर्ट नंबर 1- मैं एक बिल्डर के पेट से रिपोर्ट कर रहा हूं। मुझे खाने वाला साला शातिर पेटू लगता है। इस पेट में मेर अलावा सैकड़ों टन सरिया, हाारों बोरी सीमेंट और तमाम टाइल्स भी भर पड़े हैं।ड्ढr ड्ढr रिपोर्ट नंबर 2- मुझे चबाने वाला सालों का भूखा लगता है। इसकी आंत बता रही थी कि इसे सरकारी फाइलें खा जाने की बीमारी थी। पहले क्लास टू अफसर था। फाइलें डकारने के बाद क्लास वन हो गया।ड्ढr ड्ढr रिपोर्ट नंबर 3- मैं एक मंत्री के पेट से बोल रहा हूं। इस पेट में तमाम घोटाले दफन हैं। एक घोटाला मुर्गे- मुर्गियों के दानों का भी है। मैं तलाश रहा हूं कि एकाध दाना मुझे भी मिल जाए लेकिन मंत्री का पेट सरकारी खजाने की तरह खाली है।ंं

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