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हिंदी में मेडिकल की पहली किताब वरदान

इस हिंदी भाषी शहर में बुक स्टॉलों पर किताबों के ढेर में शामिल एक पुस्तक इन दिनों मेडिकल छात्रों का ध्यान खींच रही है। यह मेडिकल की हिंदी में पहली पाठय़ पुस्तक है। 1000 पृष्ठों वाली इस पाठय़ पुस्तक का नाम ‘रोग निदान’ है और यह हिंदी भाषी मेडिकल छात्रों के लिए वरदान साबित हो रही है। हिंदी माध्यम से पढ़े छात्रों को यह पुस्तक आकर्षित कर रही है। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में मेडिसीन विभाग के प्रमुख की हैसियत से काम करते हुए एसएसएल श्रीवास्तव को इन छात्रों की समस्याआें से वाकिफ होने का मौका मिला और उन्होंने हिंदी में मेडिकल की पहली पाठय़ पुस्तक लिखने का फैसला कर लिया। दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल में बर्न्‍स डिपार्टमेंट के प्रमुख रह चुके एसपी बजाज इस पुस्तक को मेडिकल की पढ़ाई करने वाले हिंदी भाषी छात्रों के लिए बेहद उपयोगी मानते हैं। वह कहते हैं कि यूं तो हिंदी में मेडिकल पर कई गाइड बुक उपलब्ध हैं, लेकिन इस भाषा में पाठ्य पुस्तक पहली बार आई है। पांच सौ रुपये की इस पुस्तक को बिना किसी तामझाम के वर्ष 2007 में लांच किया गया था। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, हरियाणा जसे हिंदी भाषी राज्यों में इसकी मांग बढ़ रही है। इस पुस्तक को लिखने में चार साल लगे, जबकि प्रूफरीडिंग में तीन साल और प्रकाशन में एक साल लगा। श्रीवास्तव कहते हैं कि इसमें बीमारियों के लक्षणों, निदान, नब्ज देखने की तरकीब, धड़कन के आकलन, जिगर आदि से जुड़ी समस्याआें की पहचान के बारे में मुकम्मल जानकारी दी गई है।

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