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सरकार बचाने के गणित में उलझे आजाद

ाम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) द्वारा समर्थन वापसी के बाद सोमवार को विधानसभा में बहुमत साबित करने के गणित मंे उलझ गए हैं। राज्य की 87 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 21 विधायक हैं और उसे 15 निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है। यदि केंद्र में वाम दलों ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार से समर्थन वापस नहीं लिया, तो उसे माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के दो विधायकों का भी समर्थन प्राप्त हो सकता है। विधान सभा में नेशनल कांफ्रेंस के 24, पीडीपी के 17, पैंथर्स पार्टी के चार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और जम्मू मुक्ति मोर्चा का एक-एक विधायक है। नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी ने बहुमत प्रस्ताव के विरोध में मतदान के लिए अपने विधायकों को सदन में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। एक निर्दलीय विधायक शाहजहां डार के पीडीपी के पक्ष में वोट देने की संभावना है। बसपा सदस्य मंजीत सिंह ने भी पीडीपी का समर्थन करने की घोषणा की है। पैंथर्स पार्टी के चार विधायकों और भाजपा विधायक ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की है। पीडीपी ने पिछले हफ्ते सरकार से समर्थन वापस लिया था। सरकार के बचने की संभावना केवल पीडीपी के विद्रोहियों के पर टिकी है। पीडीपी के दो विद्रोहियों गुलाम हसन मीर और सरफराज खान के कांग्रेस सरकार को वोट देने की संभावना है। इनके साथ ही पीडीपी के कुछ अन्य विधायकों के भी पार्टी व्हिप का उल्लंघन करके सरकार के पक्ष में वोट देने की आशा है।

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