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शेयर बाजार की मंदी से खरबपति रह गए करोड़पति

शेयर बाजार में पिछले पांच-छह महीनों से जारी मंदी इस कदर छाई है कि बड़े- बड़े खरबपति सिकुड़कर अब करोड़पति या फिर लखपति ही रह गए हैं। इस साल की शुरुआत में पूंजी बाजार उफान पर था। मुंबई शेयर सूचकांक के 25000 अंकों को छूने की भविष्यवाणी की जा रही थी, लेकिन मंदी की आंधी कुछ ऐसी चली कि बड़ी- बड़ी कंपनियों के शेयर धूल चाटने लगे और तेजी की उम्मीद लगाए बैठे निवेशक देखते-देखते बाजार से गायब हो गए। इस साल जनवरी में मुंबई शेयर सूचकांक जब 21000 अंकों की सीमा पारकर 22000 की चढ़ाई चढ़ रहा था अचानक तेजड़ियों का स्वाद बिगड़ गया और गिरावट का दौर शुरु हो गया। बीते सप्ताह एक समय यह 13000 से भी नीचे चला गया। सप्ताहांत यह 13454 अंक पर बंद हुआ जो कि वर्ष के सवर्ोच्च स्तर 21150 अंक की तुलना में 36.35 प्रतिशत नीचे आ चुका है। रिलायंस समूह के मुकेश अंबानी, अनिल अंबानी, डीएलएफ के केपी सिहं, साफ्टवेयर कंपनी विप्रो के अजीम प्रेमजी और दूरसंचार क्षेत्र में कीर्तिमान बनाने वाले सुनील भारती मित्तल की दौलत पिछले पांच-छह महीनों की मंदी से 50 से 55 खरब रुपए घट चुकी है। शेयर बाजार जब पूरे उफान पर था तो इन पांचों धनपतियों की शेयर दौलत 130 खरब रुपए के शीर्ष पर थी जो कि अब घटकर 80 से 85 खरब रुपए के आसपास रह गई है। पूंजी बाजार पर नजर रखने वाली संस्था प्राइम डाटा बेस के प्रमुख पृथ्वी हल्दिया कहते हैं कि बाजार तो नीचे आना ही था। जिस रफ्तार से तेजी बनी हुई थी वह सामान्य नहीं थी। बाजार अपनी वास्तविक स्थिति में आ गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी बाजार से हाथ खींच लिए। पिछले चार-पांच महीनों से विदेशी निवेशक लगातार बिकवाल बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि कंपनियों का मुनाफा बढ़ा 20 प्रतिशत लेकिन उसके शेयरों के दाम चढ़ गए 40 प्रतिशत तक, ऐसी स्थिति यादा दिन नहीं चल सकती थी। मोटी रकम लगाने वाले मुनाफा तो काटेंगें ही। पिछले छह महीनों में संवेदी सूचकांक में 7500 से अधिक अंक की गिरावट आ चुकी है। कई जानी-मानी कंपनियों के शेयर 70 से 75 प्रतिशत तक नीचे लुढ़क चुके हैं। इसकी वजह चाहे कुछ भी हो लेकिन आम निवेशक इस मंदी में तेजड़ियों और विदेशी निवेशकों द्वारा बुने जाल में फंसकर बाजार सूचकांक की गिरावट रुकने और उसके ऊपर उठने की आस लगाए बैठ गया है। यहां तक म्युचवल फंड में निवेश करने वाले छोटे निवेशकों का सवाल है, उनकी उम्मीदों पर भी कुठाराघात हुआ है। निवेशकों को सबसे यादा नुकसान अनिल अंबानी समूह की कंपनी, रिलायंस पावर लिमिटेड में हुआ। रिलायंस पावर लिमिटेड इस साल की शुरुआत में सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू बाजार में लेकर आई। छोटे निवेशकों को कंपनी ने दस रुपए का शेयर 430 रुपए में दिया। बाद में बाजार की मंदी को देखते हुए कंपनी ने निवेशकों को प्रत्येक पांच शेयर पर तीन बोनस शेयर दिए। इस लिहाज से औसत शेयर मूल्य 270 रुपए तक आ गया लेकिन कंपनी का बाजार भाव 127 रुपए पर धक्के खा रहा है। पिछले एक साल के उच्चतम भाव की तुलना में इसमें 66 प्रतिशत तक गिरावट आ चुकी है। रिलायंस कैपीटल 70 प्रतिशत घटकर 874 रुपए पर आ गई जबकि एक साल में इसका ऊंचा भाव 2पए तक पहुंच चुका था। इसी समूह की रिलायंस कम्युनिकेशंस का शेयर मूल्य 844 रुपए के उच्चतम भाव से 53 प्रतिशत घटकर 3पए पर चल रहा है। मुकेश अंबानी समूह की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड का शेयर एक साल के उच्चतम स्तर की तुलना में 37 प्रतिशत घटकर 2045 रुपए पर बोला जा रहा है जबकि रिलायंस पेट्रोलियम उच्चतम स्तर से 43 प्रतिशत घटकर 166 रुपए पर है। लेकिन इसी समूह की रिलायंस इंडस्ट्रियल इंप्रास्टक्चर लि. 76 प्रतिशत तक घटकर 767 रुपए रह गया है। सुनील भारती मित्तल की भारती एअरटेल का शेयर मूल्य जो कि पिछले एक साल में 114पए की ऊंचाई नाप चुका था अब 688 रुपए के आसपास चल रहा है। केपी सिहं की कंपनी डीएलएफ बड़े जोर-शोर के साथ पूंजी बाजार में उतरी थी। कंपनी ने निवेशकों को 530 रुपए का शेयर दिया था अब यह 368 रुपए के आसपास चल रहा है। डीएलएफ का शेयर 1225 रुपए तक चढ़ने के बाद 70 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ अब 368 रुपए पर बोला जा रहा है। यही नहीं सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के शेयर मूल्य भी भारी गिरावट में चल रहे हैं। एचडीएफसी 3255 रुपए की ऊंचाई छूने के बाद फिलहाल 1835 रुपए रह गया है। आईएफसीआई 140 रुपए तक चढ़ चुका था इन दिनों 31 रुपए पर धक्का खा रहा है। जिंदल स्टील 3355 रुपए की ऊंचाई छूने के बाद फिलहाल 1640 रुपए के आसपास चल रहा है। तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम का शेयर मूल्य 1400 रुपए तक चढ़ने के बाद अब 800 रुपए से नीचे चल रहा है। टाटा पॉवर साल के ऊंचे भाव से 38 प्रतिशत, टाटा स्टील और टाटा कंसल्टेंसी क्रमश 28 और 2प्रतिशत नीचे आ गए। हल्दिया के मुताबिक बाजार के बारे में कभी भी कोई निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। एक ही समय में बाजार तेजी की चाल भी चल सकता है और मंदी की वजह बताकर गिर भी सकता है। उन्होंने कहा कि इस समय बाजार में चारों तरफ मंदी की अनेक वजह गिनाई जा सकती हैं। अमरीका के साथ परमाणु डील को लेकर सरकार खतरे में है। दुनियाभर में मंदी की आशंका बनी है। ब्याज दरें बढ़ने से कंपनियों के कारोबार पर असर पड़ने की बातें हो रही हैं। महंगाई का मुद्दा लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है।

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