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डील होगी, सरकार सेफ

संप्रग सरकार ने साफ कर दिया है कि चाहे कितना ही विरोध हो, अमेरिका से वह परमाणु करार करगी। सूचना और प्रसारण मंत्री प्रियरांन दासमुंशी ने शनिवार रात को यह भी कहा कि सरकार को कोई खतरा नहीं है। दासमुंशी के इस बयान के बाद वाम दलों की समर्थन वापसी तय लग रही है।ड्ढr दासमुंशी ने कहा कि करार से सरकार कदम पीछे नहीं खींच रही है और मीडिया का एक वर्ग यह प्रचारित कर रहा है कि सरकार गिरोाएगी और लोकसभा के चुनाव समय से पहले होंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव समय पर ही होंगे। दासमुंशी ने न तो वाम दलों के बार में कुछ कहा और न ही भाापा पर।ड्ढr दासमुंशी के इस बयान से ठीक पहले सपा महासचिव अमर सिंह ने कहा था कि साम्रायवाद से बड़ा खतरा सांप्रदायिकता है औरोार्ॉ बुश के मुकाबले लालकृष्ण आडवाणी यादा खतरनाक हैं।ड्ढr उन्होंने यह भी कहा था कि संसद में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया तो वह प्रस्ताव के पक्ष में वोट नहीं देगी। अमर सिंह ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव आए, तभी हम अपने कदम पर विचार करंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सपा पहले भी संप्रग से बाहर थी और अब भी है।ड्ढr उधर, लालकृष्ण आडवाणी की इस माँग पर कि प्रधानमंत्री को लोकसभा का विश्वास हासिल करना चाहिए, कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने चुटकी ली। उन्होंने आडवाणी को कल्पना मेंोीने वाला बताया। मनीष ने कहा कि सरकार बहुमत में है तो फिर किस बात का विश्वास मत। वहीं, कांग्रेस के उत्तर प्रदेश मामलों के प्रभारी महासचिव दिग्विाय सिंह ने सपा की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा कि भाापा को बाहर रखने की उसकी भूमिका के कारण हम सपा का सम्मान करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यूपी में दोनों दलों में खास किस्म का तालमेल वक्त कीोरूरत है। यूएनपीए में दरारड्ढr नई दिल्लीहैदराबाद। एटमी करार पर सपा के समर्थन से शायद सरकार बचोाए, लेकिन यूएनपीए में उसका अस्तित्व खतर में है। यूएनपीए के घटक असोम गण परिषद (अगप) ने एलान कर दिया है कि अगर सपा यूएनपीए में बनी रही तो वह गठबंधन से बाहर होोाएगी। उसने कहा है कि उसके दो सांसद सरकार के खिलाफ मतदान करंगे। ओमप्रकाश चौटाला की इनेला और तेलुगू देशम (टीडीपी) ने भी सपा से दूरियाँ बनाना शुरू कर दिया है।ड्ढr अगप के अध्यक्ष वृंदावन गोस्वामी ने सपा के कदम का विरोध करने के साथ-साथ भाापा से तालमेल बिठाने के संकेत दिए हैं। इधर, टीडीपी के वरिष्ठ नेता आर. चंद्रशेखर रड्डी ने कहा कि सपा अब यूएनपीए का हिस्सा नहीं रही। उन्होंने कहा कि चाहे एक या दो घटक दल हमारा साथ छोड़ दें लेकिन हमार लिए विश्वसनीयता कहीं अधिक मायने रखती है। (ब्यूरो) हम शुरुआत से एटमी करार का विरोध कर रहे हैं और हमार रुख में अब तक कोई बदलाव नहीं आया है। रड्डी ने कहा, ‘यूएनपीए समाावादी पार्टी के बिना आगे बढ़ेगा और हम कोशिश करंगे कि ऐसी पार्टी का सहयोग लियाोाए तो कांग्रेस और भाापा दोनों के खिलाफ लड़ रही हैं।’ड्ढr उधर, चौटाला ने कहा कि कांग्रेस ने पहले उनकी (सपा की) बेइज्जती की और तीसरी बार फिर वे खुद को बेइज्जत करने पर तुले हुए हैं। सपा के फैसले से नाराा अगप ने भी कहा कि यूएनपीए के घटक दल मिलकर फैसला करंगे कि सपा को गठबंधन में रखाोाए या नहीं। अगप के अध्यक्ष वृंदावन गोस्वामी ने शनिवार को कहा कि एटमी करार का समर्थन करने से पहले सपा को यूएनपीए में शामिल पार्टियों की राय लेनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि अब सभी घटक दल निर्णय करंगे कि सपा को गठबंधन में रखाोाए या नहीं।ड्ढr चौटाला ने दावा किया कि सपा के बाहर निकलने के बाद यूएनपीए पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि गठबंधन में शामिल सभी पार्टियाँ एक-दूसर से विचार-विमर्श करके ही कोई कदम उठाती हैं और सभी के विचार एक हैं। सपा ने न तो पार्टी के लिए और न ही देश के लिए परमाणु करार का समर्थन किया है। (प्रेट्र) वाम ने धमकायाड्ढr कोलकाता। अपनी पार्टी के वयोवृद्ध नेता योति बसु से मुलाकात के बाद माकपा महासचिव प्रकाश करात ने शनिवार को फिर चेतावनी दी कि अगर सरकार ने परमाणु करार की ओर कदम बढ़ाए तो इससे देश की विदेश नीति पर गहरा असर पड़ेगा।ड्ढr करात ने कहा कि हमारी विदेश नीति स्वतंत्र है, लेकिन अमेरिका से परमाणु, आर्थिक या सामरिक करार किया गया तो यह स्वतंत्र नहीं रह पाएगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका हर समय धमकी देता है कि ईरान से गैस पाइपलाइन पर समझौता मत करो। उन्होंने कहा कि सरकार कहती है कि करार से अगले 15-20 साल में 40 हाार मेगावाट बिाली का उत्पादन होगा, लेकिन तब यहोरूरत का आठ फीसदी ही रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि विदेश मंत्री प्रणव मुखर्ाी ने अभी यह नहीं बताया है कि करार पर सरकार आगे बढ़ रही है या नहीं। (ब्यूरो) वाम दलों ने सातोुलाई तक सरकार से यहोानकारी माँगी है और इसके बाद ही समर्थन वापसी का फैसला होगा। (प्रेट्र)

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