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7 जिलों के विकास पर 523 करोड़ खर्च होंगे

भारत सरकार बिहार के सात जिलों के विकास पर 523 करोड़ रुपये खर्च करगी। इन जिलों में मुसलमानों की आबादी 20 प्रतिशत से अधिक है और ये विकास की मुख्य धारा से दूर हैं। इस राशि से इन जिलों में शिक्षा, स्वच्छता, गृह निर्माण, पेयजल, बिजली और जीवन यापन की अन्य सुविधायें मुहैया कराई जाएंगी। इनमें अररिया पर 81.1 करोड़, किशनगंज पर 87.रोड़, पूर्णिया पर 85.5 करोड़, कटिहार पर 82.6 करोड़, सीतामढ़ी पर 67.8 करोड़, पश्चिमी चम्पारण पर 58.6 करोड़ और दरभंगा पर 5रोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार देश में 0 ऐसे जिलों का चयन किया गया है जहां अल्पसंख्यकों की आबादी 20 प्रतिशत से ज्यादा है। ये जिले विकास की दौड़ में भी पिछड़े हैं। इनमें बिहार के ये सात जिले शामिल हैं।ड्ढr ड्ढr इन्हें माइनॉरिटी कन्सन्ट्रेशन डिस्ट्रिक्ट (एमसीडी) कहा जा रहा है। इन जिलों में पहले बेसलाइन सव्रे होगा और इसके आधार पर योजनाएं बनाई जाएंगी। योजनाओं में जिलों के लोगों की भागीदारी का प्रावधान है। पंचायती राज संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों और स्वयं सहायता समूहों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। ये संस्थाएं न केवल योजना बनाने में मदद करंगी बल्कि उनकी मॉनीटरिंग भी करंगी। इनमें जनता की भागीदारी के लिए अल खर चैरिटेबल ट्रस्ट, लोक परिषद और बिहार राबिता कमिटी की ओर से एक कार्यशाला का आयोजन भी शनिवार को किया गया। इसकी अध्यक्षता प्रो. एम.एन. कर्ण ने की। अल खर चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष अरशद अजमल ने इस कार्यक्रम का खाका प्रस्तुत किया। कार्यशाला में विधायक अख्तरूल इमान, प्रो. गुलाम गौस, नैयर फातमी, भाकपा माले के के.डी. यादव और छात्र नेता इरशाद आदि ने विचार रखे। कार्यशाला में यह विचार उभर कर आया कि इस योजना को सरकारी अमलों के भरोसे नहीं छोड़ा जाएगा बल्कि आम जनता को इसमें सीधी भागीदारी के लिए तैयार किया जाएगा।

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