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झारखंड में सरकारी मशीनरी ठीक से काम नहीं कर रही : सेन

इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमेन डेवलपमेंट रांची के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का समापन शनिवार को हो गया। समापन के अंतिम सत्र में राजनेताओं ने झारखंड के विकास और मानव विकास पर अपनी तल्ख टिप्पणी की। अधिकांश राजनेताओं ने राज्य सरकार और यहां के नेताओं को कोसा।ड्ढr सांसद भुवनेश्वर मेहता ने कहा कि अलग राज्य के बाद यह उम्मीद थी कि दलितों और आदिवासियों का विकास होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। खनिज संपदा में धनी झारखंड का विकास साढ़े सात साल में नहीं के बराबर हुआ। लोगों में इस बात की उदासी है कि खनिज संपदा की लूट हो रही है। यहां उद्योग नहीं लग रहे हैं। प्रदेश में अब तक विस्थापन नहीं बनी। सबसे अधिक आदिवासी और दलित ही उजड़े हैं। 40 प्रतिशत रिश्वत ली जा रही है। एक-एक बीडीओ 50 से 60 लाख रुपये कमा रहा है। सारा टेंडर मंत्री निपटाते हैं।ड्ढr केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा कि झारखंड स्टेट ऑफ एनार्की है। यहां कार्य संस्कृति है ही नहीं। प्रशासनिक संस्कृति भी नहीं बना पायी। झारखंड शत-प्रतिशत हॉर्टिकल्चर प्रदेश है। खनिज संपदा में धनी है, लेकिन सात-आठ वर्षो में एक रुपये का भी निवेश नहीं हुआ। दुनिया के अमीर यहां आना चाहते हैं। सभी लोगों को आयरन ओर चाहिये। यहां सब अपने-आपमें सीएम हैं। सरकार के पास विजन ही नहीं है। ऐसी सरकार रहे या जहन्नुम में जाये।ड्ढr पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड में पैसे का उपयोग तो होता ही है दुरूपयोग भी होता है। जनता के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। सिंहभूम में टाटा का कारखाना सौ वर्षो से है। इसके बावजूद सिंहभूम में 57 फीसदी लोग बीपीएल से नीचे हैं। उद्योग से ही विकास होगा, यह जरूरी नहीं है। लोगों को शिक्षित करना सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिज्ञों को कठोर निर्णय लेना होगा।ड्ढr वन मंत्री सुधीर महतो ने कहा कि विकास के नाम पर एक-दूसर को नीचा दिखाने से या उनके बार में टिप्पणी करने से कुछ नहीं होगा। सभी को अपने अंदर झांक कर यह देखना होगा कि हमने क्या किया। हमार अंदर क्या क्षमता है और हम क्या कर सकते हैं। हर किसी को विकास के लिए शुरुआत करनी होगी। वह कुटीर उद्योग को बढ़वा देना चाहते हैं, ताकि गांव का विकास संभव है।ड्ढr विधायक सरयू राय ने प्रशासनिक ढांचा में सुधार पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि कार्यपालिका से विधायिका ज्यादा जिम्मेवार है। इस राज्य को कृषि क्षेत्र को प्रधान बनाना होगा, क्योंकि उद्योग से अधिक वर्षो तक हम आश्रित नहीं रह सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि प्लानिंग कमीशन झारखंड पर ध्यान नहीं देता है। उन्होंने प्लानिंग कमीशन के सदस्यों से आग्रह किया कि उनके पास असीम अधिकार है।ड्ढr डॉ रायदयाल मुंडा ने कहा कि प्लानिंग कमीशन राज्य के विकास के लिए पहले प्राथमिकता तय कर। झारखंड की प्राथमिकता जल, जंगल, पहाड़ होनी चाहिए। झारखंडियों का विकास होना चाहिए। उनका नहीं जो शहर में रहते हैं, बल्कि उन झारखंडियों के लिए जो जंगलों में बसते हैं।ड्ढr समापन समारोह में प्लानिंग कमीशन के सदस्य अभिजीत सेन ने कहा कि झारखंड में सरकारी मशीनरी सही तरीके से काम नहीं कर रही है। आधारभूत संरचना की कमी है। सभा की अध्यक्षता प्लानिंग कमीशन के सदस्य बी युगांधर ने की। मौके पर वरिष्ठ पत्रकार हरिवंश ने भी अपने विचार रखे।ं

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