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फोकस अब विश्वास मत पर

अब जब लेफ्ट की समर्थन वापसी पक्की हो गयी है, भाजपा विश्वास प्रस्ताव पर मत विभाजन पर जोर देकर सरकार को घेरना चाहती है। हालांकि सपा से समर्थन का भरोसा मिल गया है, यूपीए जल्दी में नहीं है। दरअसल, लेफ्ट के संकेत हैं कि वह विश्वास प्रस्ताव के विरोध में मत देगा। इसके लिए लोकसभा में होने वाली बहस भी सत्ता पक्ष के लिए मुसीबत का सबब है।भाजपा के आडवाणी और जसवंत सिंह ने शनिवार को यहां चुनौती की मुद्रा अपनायी और यूपीए सरकार को अल्पमत सरकार करार देते हुए उससे संसद का सत्र अविलंब बुलाने और विश्वासमत हासिल करने की मांग की है। वे यहां तक कह गए कि यदि प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह स्वयं विश्वास प्रस्ताव पेश नहीं करते तो राष्ट्रपति को सरकार को विश्वासमत हासिल करने का निर्देश देना चाहिए। याद रहे कि डॉ. सिंह जी-8 की बैठक में भाग लेने जापान जा रहे हैं, जहांोुलाई को उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से भी मुलाकात होनी है। आडवाणी ने कहा कि अल्पमत में आ गई सरकार को अंतरराष्ट्रीय समझौता करने का अधिकार नहीं है। यूपीए को जम्मू-कश्मीर की मिसाल पर गौर करना चाहिए जहां पीडीपी की समर्थन वापसी की धमकी के बाद कांग्रेस की गुलाम नबी आजाद सरकार शक्ित परीक्षण का सामना कर रही है। लेकिन इस मांग को कांग्रेस ने चंद घंटों बाद ही ठुकरा दिया। पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने आडवाणी पर काल्पनिक दुनिया में जीने का आरोप लगाते हुए कहा कि आडवाणी की मांग ‘हास्यास्पद’ है क्योंकि अभी सरकार बहुमत में है और लेफ्ट ने अभी तक समर्थन वापस नहीं लिया है। उन्होंने इस तरह की मांग को संवैधानिक रूप से भी अमान्य बताया।

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