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अहम फैसलों की उम्मीद नहीं है जी-8 सम्मेंलन से

खाद्यान्न संकट.जलवायु परिवर्तन, तेल की बढ़ती कीमत, उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम और जिम्बाब्वे के राजनीतिक हालात का समाधान तलाशने जापान के होकाइडो द्वीप में सोमवार से शुरू हो रहे जी-8 सम्मेलन में जुट रहे विश्वनेताआें की दिलचस्पी इन अहम मुद्दों की बजाए नवंबर मंे अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में यादा रहेगी। होकाइडों के सुदूर पर्वतीय पर्यटन स्थल मंे 7 से जुलाई के बीच आयोजित इस सम्मेलन में दुनिया के आठ धनी देशों मेजबान जापान समेत अमेरिका, इटली, फ्रांस, जर्मनी, रूस तथा कनाडा के साथ तेजी से उभरती विश्व अर्थव्यवस्थाआें वाले देश चीन, भारत और ब्राजील भी शिरकत कर रहे हैं। जलवायु परिवर्तन सम्मेलन का मुख्य एजेंडा है। लेकिन विकसित और विकासशील देशों के बीच ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती को लेकर मतभेद इस दिशा मंे किसी ठोस नीति के रास्ते मंे बड़ी रुकावट बनेंगे। पिछली बार जर्मनी मंे आयोजित जी-8 सम्मेलन मंे हालांकि सदस्य देशों ने वर्ष 2050 तक ग्रीन हाउस गैसों में 50 फीसदी कटौती के मसले को गंभीरता से लिया था लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यु बुश के इस अड़ियल रवैये ने कि जबतक चीन जैसे विकासशील देश इसपर सहमत नहीं होते वह रजामंद नहीं होंगे सारे प्रयासों पर पानी फेर दिया है। कार्बन व्यापार और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भी सम्मेलन से किसी अहम घोषणा की संभावना नहीं दीखती। एशिया कार्बन व्यापार के निदेश के एंथनी सीड के मुताबिक ग्रीनहाउस गैसांे में कटौती के लिए जी-8 नेताआें की आेर से स्वच्छ ऊर्जा के जोरदार समर्थन की आशा कर रहे लोगों को नाउम्मीदी ही हाथ लगेगी। क्योंकि धनी देश इस तरह के कदम को अपनी आर्थिक विकास की रफ्तार को रोडा मान रहे हैं।

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