अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मानना रूठे सुजन का

ांग्रेस और समाजवादी पार्टी का एक साथ आना सिर्फ परमाणु समझौता करवाने और जल्दी लोकसभा चुनाव की आशंकाओं को टालने के लिए ही नहीं है। इसके और भी कई निहितार्थ हैं। एक बात तो इससे यह साफ होती है कि कांग्रेस ने गठबंधन के यथार्थ को पूरी तरह मान लिया है। समाजवादी पार्टी से उसका लगातार विरोध बुनियादी तौर पर इस आधार पर था कि उत्तर प्रदेश में 80 लोकसभा सीटें हैं और इनको छोड़ कर कोई भी पार्टी केन्द्र में अपने बूते बहुमत पाने की नहीं सोच सकती। पी.वी. नरसिंह राव के वक्त में केन्द्र की कांग्रेस सरकार और उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव और बिहार में लालू प्रसाद यादव से एक अलिखित समझौता था कि कांग्रेस इन राज्यों में मौजूद सरकारों को नहीं छेड़ेगी और बदले में ये दल केन्द्र की कांग्रेस सरकार के लिए दिक्कतें पैदा नहीं करंगे। यह समझौता कई कांग्रेसियों को नागवार गुजरा था और सोनिया गांधी के सक्रिय राजनीति में आते ही कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में अपना स्वतंत्र अस्तित्व स्थापित करने और अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिशें शुरू कर दी थीं। पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस को यह लगने लगा है कि बसपा की बढ़ती ताकत के मद्देनजर समाजवादी पार्टी से समझौते में ही भलाई है। मुलायम सिंह यादव यूं भी दुनियादार और जमीनी राजनेता हैं और अपनी ओर से वे लगातार कांग्रेस से सीधे दुश्मनी लेने से बचते रहे हैं। उनकी भी वही मजबूरी है। उत्तर प्रदेश में बसपा के नए जातीय समीकरणों से जूझना अकेले सपा के बस की बात नहीं है। कांग्रेस का अपना 8-10 प्रतिशत वोट उत्तर प्रदेश में है और इसलिए कांग्रेस और सपा मिलकर बसपा को अच्छी टक्कर दे सकते हैं। वैसे भी इस देश में दो मोर्चो का यथार्थ स्पष्ट हो गया है और तीसर मोर्चे का विचार अब कोई मतलब नहीं रखता। इसी तरह कांग्रेस या भाजपा अपने-अपने मोर्चो की धुरी भले ही बन जाएं लेकिन अपने बूते बहुमत पाना उनके लिए संभव नहीं है, ऐसे में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और सपा का समीकरण बनना स्वाभाविक है। बसपा की तरह सपा की कोई बड़ी राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा नहीं है, इसलिए भी कांग्रेस से उनके हित टकराने का खतरा नहीं है। कांग्रेस को लेकिन उत्तर प्रदेश में फिर बड़ी ताकत बनने का अपना दावा छोड़ना होगा, लेकिन अगर तमाम समाजवादी और जनता धड़े गैर कांग्रेसवाद को छोड़ सकते हैं तो क्या कांग्रेस अपने कुछ पुराने मोह नहीं त्याग सकती?ं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: मानना रूठे सुजन का