अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

गोसाईं चरित पर विद्वानों ने उठाए सवाल

यूपी बोर्ड के पाठय़क्रम को कटघरे में खड़ा करने वाले विद्वानों ने संत कवि तुलसीदास के जीवनीकार बेनी माधव की कृति ‘मूल गोसाईं चरित’ पर ही सवाल उठा दिए हैं। इन विद्वानों का कहना है कि यह रचना संदिग्ध और अप्रामाणिक है। तुलसीदास के रत्नावली से विवाह की कहानी इसी में है जो कपोल काल्पित है। यूपी बोर्ड के हाईस्कूल की पाठय़पुस्तक ‘काव्य संकलन’ में रत्नावली द्वारा तुलसीदास को धिक्कारे जाने की घटना का जिक्र है। पुस्तक में लिखा है कि इस घटना का विवरण बेनी माधव द्वारा रचित ‘मूल गोसाईं चरित’ और राघवदास द्वारा रचित ‘तुलसी चरित’ में मिलता है। जबकि सनातम धर्म परिषद के अध्यक्ष डॉ. स्वामी भगवदाचार्य ने कहा कि बाबा बेनी माधव गोस्वामी तुलसीदास के शिष्य थे। उन्होंने ‘गोसाईं चरित’ नामक ग्रंथ की रचना की थी। इस ग्रंथ में फेरबदल कर मूल गोसाईं चरित लिखी गई जो प्रामाणिक नहीं है। स्वामी भगवदाचार्य ने रविवार को ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय में 31 मई 10 में आयोजित एक सम्मेलन में आचार्य विश्वनाथ मिश्र, डॉ. नागेन्द्र आदि विद्वानों ने इस रचना का अप्रामाणिक सिद्ध किया है। उन्होंने कहा कि सोरो एटा में भी एक तुलसी हुए, जिन्होंने छप्पया, छन्दावली, कुण्डलियाँ और कडख़ा रामायण की रचना की। इनकी पत्नी का नाम रत्नावली था। जो खुद कवयित्री और विदुषी थीं। रत्ना की फटकार से तुलसी को प्रबोध मिला था। यह तुलसी, मानस के तुलसीदास से अलग थे। तुलसी दास आजन्म ब्रह्मचारी व अविवाहित थे। अपनी कृति ‘विनय पत्रिका’ में उन्होंने एक जगह खुद कहा है कि-‘ब्याह न बरेखी, जाति-पाँति न चहत हौं।’ भगवदाचार्य कहते हैं कि भला आप ही बताइए कोई शव पर बैठ कर कैसे उफनाती नदी पार कर सकता है? फिर तुलसी अगर अपने ससुराल गए तो उन्हें खिड़की से जाने की क्या जरूरत थी? यह सब मनगढ़ंत कहानियाँ हैं। उन्होंने कहा कि इस गलत इतिहास को पाठय़पुस्तकों में पढ़ाया जाना आपत्तिजनक है। अगर किसी के पास गोस्वामी तुलसीदास के विवाह संबंधी अकाटय़ प्रमाण है तो वह दिखाए।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: गोसाईं चरित पर विद्वानों ने उठाए सवाल