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बिगड़ रही है दिल्ली की तबीयत

इस साल दिल्ली के स्वास्थ्य के आंकड़े बुरे साबित होने जा रहे हैं। एक हालिया अध्ययन के मुताबिक, इस साल दिल्ली में कैंसर के सबसे यादा मामले (52.68 प्रतिशत) सामने आएंगे। हालात मुंबई के भी बहुत अच्छे नहीं हैं पर उम्मीद है कि इस साल कैंसर के मामलों में यहां 3.25 फीसदी की गिरावट देखने को मिलेगी। यह अध्ययन किया है बेंगलुरु के नेशनल इंस्टीटय़ूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंस के डिपार्टमेंट ऑफ बायोस्टेटिक्स के पी मारिमुथू ने। मारिमुथू ने कैंसर के मामलों का उम्र के नजरिए से व्यापक अध्ययन किया है। वैसे तो पर्यावरण, लाइफस्टाइल, धूम्रपान, पेशा और बेंजामिन व निट्रोसेमाइन जसे रसायनों का संपर्क जसे कैंसर के अनगिनत कारण हैं मगर डॉक्टर मारिमुथू ने अपने अध्ययन का आधार जीवन की संभावना के बढ़ने को बनाया है। इससे देश में उम्रदराज लोगों का अनुपात बढ़ गया है। डॉक्टर ने कहा, ‘धम्रूपान और अन्य कारकों के अलावा उम्र और अनुवांशिक कारणों से भी कैंसर होता है। उम्रदराज लोग यादा जोखिम में हैं।’ देशभर में जिनती मौतं होती हैं उनमें से 3.6 फीसदी मौतों का कारण कैंसर है। इसके अलावा कैंसर से मृत्यु के 50 फीसदी मामले 55 या उससे अधिक आयुवर्ग में होते हैं। दिल्ली में 50 से 54 और 40 से 44 साल के बीच की महिलाओं को कैंसर होने का यादा खतरा है। इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च के मुताबिक, दिल्ली की महिलाओं में गाल ब्लेडर कैंसर के मामले प्रति एक लाख में 10.6 हैं, जो कि विश्व में सर्वाधिक है। थाइरॉयड कैंसर के मामले केरल और कर्नाटक के तटीय इलाकों में काफी पाए जाते हैं। इस अध्ययन में बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, मुंबई और भोपाल को शामिल किया गया।

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