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चागह थी 5357 की सिफारिश 22 सौ

पुलिस बहाली में 22 सौ जगहों के लिए राजनीतिक दलों की ही सिफारिशें थीं, इसमें सीएमओ भी हैं। झामुमो ने बकायदा आठ सौ लोगों की सूची विभिन्न जिलों के कप्तानों तथा चयन समिति के अध्यक्षों को सौंपी की थी। इसकी एवज में चयन समिति के एक अध्यक्ष को जिले में बने रहने का अभयदान तक मिला। दारोगा के साथ हुई घटना में इनका नाम है। इसकी जांच राज्य मुख्यालय से जारी है।ड्ढr सरकार को टिकाये रखने का दंभ भरने वाले कुछ निर्दलीय माननीयों की सूची भी लंबी थी। कांग्रेस की ओर से 235 अभ्यर्थियों सूची दी गयी थी। भला राजद कब पीछे रहने वाला, उसने भी 350 नाम पुलिस कप्तानों क ो दिये गये। इसके लिए राजद के कई नेता पटना-रांची एक किये रहे। प्रेशर दिल्ली से भी दिया गया। और तो और मुख्यमंत्री सचिवालय से भी 200 को भर्ती करने का सिफारिशी पत्र भेजा गया। जानकारों पर भरोसा करं तो बहाली के लिए सीएम पर साथी दलों व निर्दलीय विधायकों का काफी दबाव था। झारखंड में जिला बल और इंडिया रिजर्व बटालियन में करीब साढ़े पांच हजार पदों पर बहाली होनी थी। नौकरी के लिए दस लाख युवकों ने आवेदन दिया था। सरकार का समर्थन कर रहे दलों के नेताओं की लंबी सूची और बढ़ते प्रेशर से वरीय पुलिस अफसर भी परशान थे। मुख्यमंत्री मधु कोड़ा द्वारा बहाली को ही रद्द करने की घाोषणा से पुलिस महकमे ने राहत की सांस ली है। लेकिन उन्हें अब इस बात का भी खुलासा करना ही होगा कि पैरवी करने वाले कौन-कौन नेता थे।

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