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जलवायु परिवर्तन ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े : मनमोहन

जी-8 देशों के सम्मेलन में भारत दुनिया के धनी देशों को यह समझाने की कोशिश करेगा कि खाद्यान्न और ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दों को शामिल किए बगैर जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निबटना संभव नहीं होगा। भारत का यह पक्ष सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन के सबंध में लिए जाने वाले अहम फैसलों की राह में जी आठ देशों के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है। जापान के होकाइडों मंे सोमवार से शुरू हो रहे इस सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन मुख्य एजेंडा है। इस बार विकसित और विकासशील देशों के लिए वर्ष 2050 तक दीर्घकालित तथा वर्ष 2020 तक अंतरिम तौर पर ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के कड़े मानक तय किए जाने हैं। सम्मेलन में शिरकत करने के लिए होकाइडो रवाना होने के पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का यह बयान कि जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा और खाद्यान्न सुरक्षा परस्पर जुड़े हुए मुद्दे हैं और इनके समाधान का समन्वित प्रयास जरूरी है इस बारे में भारत के रुख को स्पष्ट करता है। सिंह यह साफ तौर पर कह चुके हैं कि भारत की सवर्ोच्च प्राथमिकता देश से गरीबी हटाना है जिसके लिए सतत आर्थिक विकास पहली जरूरत होगी। पर्यावरण विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि भारत के समान ही अन्य देश भी सम्मेलन में अपनी बात मनवाने की हरसंभव कोशिश करेंगे। मसलन जापान 2020 तक ग्रीन हाउस गैसों में कटौती की समय सीमा तय नहीं करना चाहता जबकि अमेरिका इस मामले में चीन पर दबाव के हक में है ऐसे में आम सहमति के आसार क्षीण लगते हैं।

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  • Web Title: जलवायु परिवर्तन ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े : मनमोहन