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शिक्षा और रोचागार

शिक्षा! ‘अच्छी शिक्षा’ एक बच्चे के विकास के लिए एक अनमोल उपहार है जो कि हर माता-पिता अपने बच्चे को उपलब्ध कराने का प्रयत्न करते हैं। बदलते समय के साथ-साथ लोगों में शिक्षा के प्रति जागरूकता आई है, वहीं शिक्षा के मायने भी बदल गए हैं। पुराने समय में शिक्षा की उपयोगिता केवल ज्ञानवर्धन व कुछ उच्च वर्गो तक ही सीमित थी। आज शिक्षा को रोगार बढ़ाने का माध्यम समझा जाता है। आज का युवा वर्ग आधुनिक तकनीकी कोर्स में अपने लिए सही अवसर ढूंढ़ता है। ये उसके जीवन कौशल को ही नहीं निखारते, अनेक रोगार के अवसर भी उत्पन्न कराते हैं।ड्ढr इकबाल मियां, ओखला, नई दिल्ली वीआईपी क्षेत्र में मच्छर ‘जहां न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि’ का अनुसरण करते हुए मच्छर-महाराज अफसर-ए-आजमों की खरगाहों में घुस गए। उनकी हिफाजत, तरफदारी करने पहुंचे कर्मचारियों को बड़ी सरकारों ने बाहर का रास्ता दिखाया। ‘जाओ! र, मच्छर तुम जाओ र! यह है अफसरों की बस्ती।’ समय-समय की बात है अब मच्छरों को भी एमसीडी की गलियां-चौबार छोड़कर एनडीएमसी की पॉश लोकेशन रास आने लगी। मच्छरों की इस प्रकार की आवाजाही से मलेरिया विभाग के कर्मचारियों को भी टेंशन फील होने लगा। शायद अब मच्छर-पीड़ा का भोग फिफ्टी-फिफ्टी एमसीडी और एनडीएमसी दोनों को महसूस होगा। यकीनन अब विभाग के कुछ कर्मचारियों को कमा कर भी खाना होगा।ड्ढr राजेन्द्र कुमार सिंह, रोहिणी, दिल्ली रियल्टी शो का सच आज हर रो नए-नए रियल्टी और टेलेंट हंट शो टीवी में आ रहे हैं। लोगों का मनोरांन करने के लिए इन कार्यक्रमों में जमकर इमोशनल ड्रामा होता है। उसके बाद एसएमएस के जरिये वोट मांगे जाते हैं। इसके लिए क्षेत्रीयता को भुनाने की भी कोशिश की जाती है। भोली-भाली जनता छलावे में आकर एसएमएस पर एसएमएस भेजती है। यह जानते हुए भी कि उसे एक एसएमएस पर दस गुना तक खर्च करना पड़ता है। लोगों को इनके छलावे में नहीं आना चाहिए। बेवकूफ बनती है जनता और इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रतिभागी क्योंकि विभिन्न तरह के पक्षपातों से भरी एसएमएस वोटिंग भला सही प्रतिभा का चुनाव कैसे कर सकती है? युवा इन टैलेंट शो के प्रति काफी उत्साहित होते हैं। उन्हें तरक्की और शोहरत पाने का यह आसान तरीका लगता है। उन्हें चाहिए कि ऐसे शो के लिए अपना समय बर्बाद न करं।ड्ढr पूजा परमार, चंडीगढ़ महंगाई कम कर सकते हैं लालू मैं चार साल पहले पांच रुपया किराया चुका कर तहसील मुख्यालय पहुंचता था आज पन्द्रह रुपया देना पड़ रहा है। महंगाई ने मेरी तरह के आमजन का जीना मुहाल कर डाला है। वर्तमान महंगाई के पीछे तेल की कीमतों में आये अभूतपूर्व उछाल को बताया जा रहा है। इसी देश में एक ऐसा भी संस्थान है जिसने पिछले चार सालों से किरायों में कोई वृद्धि नहीं की। रेलवे के किराये स्थिर बने हैं। मैं भारत की जनता और शासक गठबन्धन के सम्मुख यह सुझाव रखना चाहता हूं कि इन बचे हुए कुछ महीनों के लिए लालूप्रसाद यादव को प्रधानमंत्री का पद दे दें ।ड्ढr यायावर, चमोलीं

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