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कभी नं. 2 से संतुष्ट थे राफा

सपने सभी देखते हैं पर जो उन्हें साकार करते हैं वह वीर होते हैं। किंग ऑफ क्ले राफेल नदाल ने रविवार को विम्बलडन जीतने का सपना साकार किया। यह आसान नहीं था। पांच साल से स्विटरलैंड के रोर फेडरर यहां अपनी बादशाहत कायम किए हुए थे। उन्होंने घासीली सतह पर लगातार 65 मैच जीते हुए थे। खैर, वीर असंभव कार्य भी संभव कर डालते हैं। लाल बजरी के बादशाह राफा ने घास के शहंशाह रोर फेडरर का तिलस्म तोड़ दिया। चेन्नई ओपन के दौरान बड़ी विनम्रता से राफा ने फेडरर का वर्चस्व स्वीकार करते हुए कहा था कि मैं नम्बर दो पर खुश हूं। मेरे समय में रोर फेडरर जसा अपराजेय महानायक है तो मुझे दूसर नम्बर पर भी कोई मलाल नहीं। उसी अपराजेय महानायक की बादशाहद को नदाल ने रविवार रात चार घंटे 48 मिनट चले मैराथन मुकाबले में ध्वस्त कर दिया। हालांकि फेडरर अब भी नं. एक हैं और नदाल की निगाह में महान हैं पर खुद फेडरर का विश्वास जरूर डगमगा गया होगा। वह ब्योर्न बोर्ग के लगातार पांच विम्बलडन खिताब का रिकार्ड तोड़ना चाहते थे। अपने 12 ग्रैंड स्लैम खिताबों में भी इजाफा करना चाहते थे। पर नदाल अड़चन बनकर सामने आ गए। यही नहीं अब आगे भी वह उनकी राह में बड़ी बाधा साबित होंगे। पिछले वर्ष पांच सेट के ऐसे ही रोमांचक मुकाबले में हार के बाद नदाल रस्ट रूम में रोए थे। इस बार फेडरर निराश थे और राफा ने बदला लेकर अपनी खुशियां को आसमान तक पहुंचा दिया था। वीर जहां अपने लिए अपार खुशी लाते हैं वहीं अपने देश को भी सम्मानित करते हैं। राफा की जीत जहां स्पेन के लिए 42 वर्ष बाद विम्बलडन जीतने की खुशी लाई है वहीं वह 10 में बोर्ग के बाद एक ही साल में फ्रेंच ओपन और विंबलडन खिताब जीतने वाले खिलाड़ी बने हैं। अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ फाइनल जीतने के बाद राफा जमीन पर लेट गए। उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे। उनका खेल देखने उनका परिवार ही नहीं बल्कि स्पेन के राजकुमार फिलिप और राजकुमारी लेटिजिया भी मौजूद थे। उनके कंधों पर स्पेन का ध्वज था। नदाल ने रॉयल बाक्स में अपने देश के राजकुमार से हाथ मिलाया और फिर प्रशंसकों से घिर गए। उन्होंने कहा कि मैं कैसा महसूस कर रहा हूं, यह बताना मुश्किल है। विंबलडन जीतना मेरा सपना था जो पूरा हो गया। स्पेन का दबदबा अब तक मिट्टी की सतह पर ही माना जाता था पर अब जब विम्बलडन की घासीली सतह पर राफा ने झंडा फहराया है तो विश्व टेनिस के समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। अपराजेय फेडरर पहले भी कुछ मैच हार कर अपनी छवि बरकरार नहीं रख पाए हैं। राफा का उनके साम्राज्य पर यह धावा निश्चित ही दुनिया के नए नं. वन की ओर इशारा कर रहा है। फेडरर न होते तो राफा कई बार विम्बलडन जीतते। खैर, अब लगता है कि नदाल नं. दो खिलाड़ी बने रहने से संतुष्ट नहीं हैं।

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