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आरक्षण को ही मानते हैं एफर्मेटिव एक्शन

एफर्मेटिव एक्शन के देश अमेरिका में भारतीय मूल के दलितों और अल्पसंख्यकों ने मांग की है कि भारत में निजी क्षेत्र, सेना और न्यायपालिका में भी आरक्षण दिया जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय दलित-अल्पसंख्यक फोरम के तीन दिनों के सम्मेलन के समापन पर जारी 12 सूत्री ‘न्यूयार्क घोषणा पत्र’ में आरक्षण पर खासा जोर दिया गया है। इससे लगता है कि दलित आरक्षण को ही एफर्मेटिव एक्शन मानते हैं। इसमें कहा गया है कि राज्य विशेष की सामाजिक संरचना के मद्देनजर 50 फीसदी से अधिक भी आरक्षण दिया जाना चाहिए। इसमें अल्पसंख्यकों के लिए भी 15 फीसदी आरक्षण की मांग शामिल है। दलित मुसलमानों और दलित ईसाइयों को भी अनुसूचित जाति का दर्जा देने की मांग है। संसद एवं विधायिकाओं में अनुसूचित जाति जनजाति का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग भी है। भारतीय मूल के अमेरिकी मुसलमानों की संस्था ह्यआफमी (अमेरिकन फेडरशन आफ मुस्लिम आफ इंडियन ओरिािन) ह्य द्वारा आयोजित सम्मेलन का समापन भाषण करते हुए दलित नेता राम विलास पासवान ने कहा कि भारत में सत्ता जब तक अल्पसंख्यकों के हाथ नहीं आती, दलितों, अल्पसंखकों एवं अन्य कमजोर तबकों का सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास संभव नहीं। सम्मेलन में दुनिया के विभिन्न हिस्से और खासतौर से भारत में दलितों और अल्पसंख्यकों की राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक स्थिति पर शोधपत्रों पर गहन विमर्श हुआ। आफमी में अधिकतर गुजरात और महाराष्ट्र (मुंबई) के मुसलमान हैं। लिहाजा अधिकतर वक्ताओं के निशाने पर सांप्रदायिकता, नरन्द्र मोदी, लालकृष्ण आडवाणी, बाल ठाकर और उनकी शिवसेना ही रहे। सम्मेलन के दूसर दिन गुजरात में गोधराकांड के बाद हुए साम्प्रदायिक दंगों के अदृश्य पहलुओं, दंगों में गुजरात पुलिस-प्रशासन की भूमिका को उाागर करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता शीतलवाड, पत्रकार तरुण तेजपाल और गुजरात पुलिस के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक आर बी श्रीकुमार को सम्मानित किया गया। सम्मेलन में कहा गया कि दलितों और अल्पसंख्यकों की समस्याएं एक सी हैं इसलिए उन्हें एक-दूसर पर होने वाले अत्याचारों और उत्पीड़न का प्रतिकार मिलजुलकर करना चाहिए।ड्ढr जम्मू-कश्मीर में पुलिस सुरक्षा बलों की हिरासत में होने वाली हत्याओं एवं लोगों के लापता होने की घटनाओं की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने तथा इनके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ विशेष अदालतों में मुकदमा चलाने की मांग की गई। बिहार में बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर का प्रबंधन बौद्ध समुदाय के लोगों को सौंपने, दिल्ली में राष्ट्रीय दलित विश्वविद्यालय खोलने, नई दिल्ली में दलितों के सांस्कृतिक एवं शैक्षिणिक विकास के लिए भारतीय अंतरराष्ट्रीय दलित सेंटर शुरू किए जाने की वकालत की गई।

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