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चेरापूंजी में बारिश घटने के कारणों की जांच

देश में सबसे यादा बारिश वाले स्थान चेरापूंजी में बारिश लगातार घट रही है। इसे लेकर वैज्ञानिक चिंतित हैं। ऐसा माना जा रहा है कि इस क्षेत्र में पारिस्थिकीय संतुलन बिगड़ रहा है। इसके अध्ययन के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय विशेषज्ञों की एक टीम चेरापूंजी भेजने पर विचार कर रहा है। उधर, राय सरकार ने भी चेरापूंजी में बारिश घटने के कारणों के अध्ययन के लिए इजराइल के कृषि मंत्रालय के साथ एक समझौता किया है। इस समझौते के तहस इजराइल के विशेषज्ञ वहां बरसाती जल के संचयन को लेकर अध्ययन करेंगे। मेघालय में बारिश घटने से मानसून पर्यटन के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इस बार मानसून के एक महीने की बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में 21 फीसदी यादा बारिश हुई है। लेकिन मेघों के घर मेघालय में 30 फीसदी कम बारिश हुई है। यदि सिर्फ चेरापूंजी की बात करें तो वहां 30 जून तक 27मिलीमीटर औसत बारिश होनी चाहिए। लेकिन अभी तक वहां सिर्फ 20मिलीमीटर बारिश ही हुई है। जो औसत से 700 मिलीमीटर कम है। चेरापूंजी में मानसून के दौरान औसत बारिश 11 हजार मिलीमीटर तक होनी चाहिए। लेकिन पिछले कुछ सालों के दौरान यह हजार तक ही पहुंच पा रही है। अब चेरापूजी से अधिक बारिश वहां से कुछ दूर मौशिलराम में होती है। इस बीच मौसम विभाग के अनुसार 2 जून तक देश भर में औसत से 21 फीसदी यादा बारिश हुई है लेकिन 8 संभाग सूखे की चपेट में हैं। इनमें मेघालय, केरल, रायलसीमा, नार्थ कर्नाटक, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा तथा गुजरात एक संभाग शामिल है। जहां 56 फीसदी तक कम बारिश हुई है। जबकि मध्य एवं उत्तर भारत में औसत से 1ीसदी तक यादा बारिश हुई है।

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  • Web Title: चेरापूंजी में बारिश घटने के कारणों की जांच