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पीएफ घोटाला कांड सुप्रीम कोर्ट में

गाजियाबाद की जिला अदालत के बहुचर्चित भविष्य निधि घोटाला काण्ड में उच्च न्यायपालिका के न्यायाधीशों के नाम घसीटे जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुये प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति के. जी. बालाकृष्णन ने सारे मामले पर फिलहाल अगले सोमवार को अपने चैम्बर में विचार करने का निश्चय किया है। चैम्बर में विचार होने के कारण इस दौरान मीडिया उपस्थित नहीं रहेगा। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति के. जी. बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खण्डपीठ ने सोमवार को गाजियाबाद स्थित अधिवक्ता कल्याण ट्रस्ट के अध्यक्ष नाहर सिंह यादव की याचिका पर सुनवाई के बाद इस मामले को अगले सोमवार को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने इसके साथ ही सालिसीटर जनरल गुलाम वाहनवती से इस मामले में मदद देने का आग्रह किया है। इससे पहले वरिष्ठ अधिवक्ता फली नरिमन ने भविष्य निधि घोटाला काण्ड की चपेट में आये न्यायाधीशों की सूची तथा अन्य दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में न्यायालय को सौंपे। नरिमन का कहना था कि वे इस मामले की सीबीआई अथवा पुलिस से जांच के पक्ष में नहीं है क्योंकि ऐसा होने पर मीडिया में सारी जानकारियां आयेंगी और इससे अनावश्यक रूप से न्यायपालिका के वरिष्ठ सदस्यों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचेगी। यह मामला साधारण भविष्य निधि घोटाला काण्ड के अभियुक्त गाजियाबाद की जिला अदालत के कर्मचारी आशुतोष अस्थाना के सनसनीखेज रहस्योद्घाटन से सम्बंधित है। अस्थाना पर आरोप है कि अन्य अभियुक्तों की मिलीभगत से वह अदालत के तृतीय और चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों के भविष्य निधि में जमा करोड़ों रुपए हड़प गया है। अदालत के कुछ कर्मचारियों की शिकायत पर हाई कोर्ट के जांच दल ने तहकीकात की तो इनके आरोप पहली नजर में सही मिले। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इसी आधार पर गाजियाबाद के जिला न्यायाधीश को उचित कार्रवाई का निर्देश दिया। इस निर्देश के आधार पर फरवरी में तत्कालीन सतर्कता अधिकारी की शिकायत पर कवि नगर थाने में आशुतोष अस्थाना और 82 अन्य व्यक्ितयों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इस प्रकरण पर कार्यवाही के दौरान अभियुक्त आशुतोष अस्थाना ने 28 अप्रैल को एसीजेएम की अदालत में दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराया। इस बयान में अभियुक्त ने अनेक न्यायाधीशों के नामों का हवाला दिया। इनमें एक न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत हैं।

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