अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

यूपी के ठेकेदार अब बदलाव !

ई-गवर्नेस की ओर बढ़ रहे उत्तर प्रदेश में ठेकेदारों की सूरत बदलेगी। गाड़ियों का काफिला, उसमें लदे-फदे असलहाधारी औरोोरोबरदस्ती- डरा धमकाकर ठेका हथियाने के दिन लद गए। ठेका चाहिए तो लैपटॉप रखिए , ब्राडबैंड कनेक्शन लीािए और नेट-ब्राऊिाग की तमीा सीखिए, क्योंकि यह ई-टेण्डिरग और ई-प्रोक्योरमेंट काोमाना आ गया है। ठेकेदारी के बवाल के लिए बदनाम लोक निर्माण सरीखे विभाग में एक हीोोन में लागू ठेका लेने की इलेक्ट्रानिक व्यवस्था ने बदलाव कीोो बयार बहाई है वह दशकों की कोशिशों के बावाूद नहीं हो सकी थी।ड्ढr इस काम मेंोुटी सरकारी मशीनरी भी मान रही है कि अभी सफर लंबाोरूर है लेकिन शुरुआत हौसला बढ़ाने वाली है। लोक निर्माण विभाग के लखनऊोोन से शुरू हुई इस व्यवस्था के तहत लगभग सभी पांीकृत ठेकेदार अब लैपटॉप से लैस हैं। इसे चलाना सीखनाोरूरी है क्योंकि अब ठेका चाहिए तो डिाीटल सिग्नेचर मान्य होगाोो सिस्टम में अपलोड हो चुका है। ठेके की व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने के लिए ठेकेदारों के पांीकरण की मौाूदा मैनुअल व्यवस्था को खत्म कर उसे भी ई-रािस्ट्रेशन में ढालने या फिर पूरी तरह खत्म करने की तैयारी है क्योंकि पांीकरण की मौाूदा व्यवस्था ने ही ठेके हासिल करने में माफिया का बोलबाला बढ़ाया है। वाकई में काम करने वालों को पांीकरण से दूर रहने की धमकी मिलती है। इससे हर ठेका किसी न किसी माफिया को मिलने की गारंटी होोाती है। ई-प्रोक्योरमेंट के काम से सीधेोुड़े मुख्यमंत्री सचिवालय और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव वीएन गर्ग के मुताबिक ठेके की मौाूदा व्यवस्था में बदलाव की पहल हो चुकी है। अभी और काम होना है लेकिन शुरुआती नतीो उत्साहवर्धक हैं।ड्ढr ं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: यूपी के ठेकेदार अब बदलाव !