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मुस्कराई गोमती,पर ड्रेचिांग की दरकार

ाीवनदायिनी गोमती की ऊपर ही ऊपर तो सफाई हो गई मगर तलहटी में बैठा गंदगी कब निकलेगा। यह नहीं साफ हुआ तो आदि गंगा का एक बार फिर से मुस्कराता दिख रहा चेहरा अधिक दिन तक नहीं टिका रह पाएगा। शहरवासियों का नदी के पानी के स्वच्छ व मीठा होने का सपना भी अधूरा ही बना रहेगा। 15ोून से नगर निगम के सैकड़ों श्रमिकों व सामाािक संगठनों के प्रयास से मैली हो चुका कुड़ियाघाट का चमन निश्चित रूप से गुलाार हो उठा है। एक बार फिर नदी तह पर सैर करने वालों काोुटना शुरू हो चुका है। सभी खुश हैं कि अंतत: उनकी मेहनत रंग ले ही आई।ड्ढr ाीवनदायिनी के लिए लखनऊवासियों का ऐसा समर्पण शायद ही पहले कभी हुआ हो। गुलालाघाट, शनिदेव मंदिर घाट, पक्का पुल, झूलेलालघाट, मनकामेश्वर घाट, शहीद स्मारक, देवरहा घाट, रस्तोगी घाट, हनुमान सेतु मंदिर, खाटू श्याम मंदिर के पास (निशातगां पुल के पास), लक्ष्मण मेला स्थल तट, छठ मेला घाट, बैकुण्ठ धाम के पास और गांधी सेतु के पास रोाना एकत्र हो रहे सामाािक संगठनों ने न सिर्फोलकुंभी उखाड़ी बल्कि सिर पर नदी के आँचल से निकली गंदगी भी खुशी-खुशी ढोया। नदी के ऊपरोमीोलकुंभी, सैवाल, नरकुल, काई आदि निकलने के बाद भी आदि गंगा का पानी अभी शुद्धता से दूर है।ड्ढr यह शुद्धता तभी आएगीोब नगर निगम की ही तरह सिंचाई विभाग भी अपना र्फा पूरा करगा। उसे सिल्ट से भर चुके तलहटी का साफ ही नहीं गहरा भी करना होगा। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता राम अवध कहते हैं कि ड्रेािंग के लिए ठोस तैयारी हो रही है। बारिश के बाद अक्तूबर में कसंलटेंट की सलाह पर तलहटी साफ करने के लिए ड्रेािंग का कार्य होगा। उनका कहना है कि वर्ष 2002 मेंोल निगम ने ड्रेािंग कराई मगर सिल्ट किनार लगा देने से बारिश में सार किए कराए पर पानी फिर गया। अपर नगर आयुक्त एसी सिन्हा का कहना है कि सभी घाटों को गंदगी से दोबारा बचाने के लिए गऊघाट के पासोाल लगा दिए गए हैं।

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