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‘डगमारा’ पनबिजली परियोजना फ्रांस ने निवेश की इच्छा जताई

सूबे की सबसे बड़ी पनबिजली परियोजना ‘डगमारा’ के लिए फ्रांस ने गहरी दिलचस्पी दिखलाई है। उसने इस परियोजना में निवेश की इच्छा भी व्यक्त की है। फ्रांस के दो अधिकारियों का दल मदद देने के इरादे से सोमवार को बिहार पहुंचा। फ्रांस ने एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) के माध्यम से बिहार को मदद का भरोसा दिया है। फ्रांस के अधिकारियों के साथ एडीबी, वैपकॉस के भी अधिकारी हैं। वैपकॉस सुपौल स्थित डगमारा परियोजना के लिए डीपीआर तैयार कर रहा है। अधिकारियों का दल मंगलवार को डगमारा पनबिजली परियोजना का स्थल निरीक्षण करगा। कोसी बराज के डाउन स्ट्रीम में 22.5 किलोमीटर पर वीरपुर से कटिहार के कुरसेला के बीच पनबिजली की क्षमता का पता चलने के बाद राज्य सरकार ने इसके निर्माण की दिशा में कसरत शुरू की।ड्ढr ड्ढr फ्रांस के पूर्व जापान और यूक्रन भी इस परियोजना के लिए मदद की पेशकश कर चुके हैं। केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय का सहयोग न मिलने पर बिजली संकट से जूझ रहे बिहार ने अपने स्तर से इस परियोजना के लिए संभावनाओं की तलाश शुरू की। ऊर्जा विभाग ने इसके लिए एडीबी से सहयोग मांगा। एडीबी ने इस शर्त के साथ कि नदियों का सव्रेक्षण उसकी एजेंसी करगी, मदद की पेशकश की। बिहार स्टेट हाइड्रोइलेक्िट्रक कारपोरेशन (बीएचपीसी) ने तत्काल उसी अनुरूप कार्रवाई भी शुरू कर दी। कोसी प्रक्षेत्र में स्थापित होने वाली 126 मेगावाट की इस परियोजना पर 650 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होने हैं।ड्ढr ड्ढr यह बिहार की सबसे बड़ी पनबिजली परियोजना होगी। यहां बीएचपीसी की 42-42 मेगावाट क्षमता की तीन पनबिजली इकाइयों के निर्माण की योजना है। ऊर्जा विभाग पहले ही इस परियोजना के लिए सारी प्रारंभिक औपचारिकताएं पूरी कर चुका है। यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो तीन वर्षो के अंदर उत्तर बिहार का बड़ा हिस्सा जगमगा उठेगा।ं

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