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कुदरत ने बचायी कई जानें

रविवार की रात मृतक भोला सिंह व उनके परिवार के लिए कहर बरपाने वाली रात साबित हुई। इस रात भोला के अलावा उनके परिवार के अन्य दो लोगों को अपराधियों ने मौत के घाट उतार दिया। मगर उनके खानदान के कई लोगों को कुदरत ने इस काली रात की साए से बचा लिया। वो इसलिए कि भोला के पुत्र उमेश, उनकी बहू वीणा देवी, पोता प्रतुल्य तथा पोती डिम्पी कुर्ाी महमदपुर में नहीं थी। अगर ये लोग भी घर में मौजूद होते तो इन लोगों की क्या हालत होती , केवल कल्पना की जा सकती है।ड्ढr ड्ढr पति से किसी बात को लेकर हुए विवाद के चलते वीणा दो बच्चों के साथ पिछले कई महीनों से अपने मायके गंगाचक, बिक्रम में रह रही है। वहीं उमेश दिल्ली से काम कर लौटने के बाद पिछले तीन-चार दिनों से अपनी बहन संजू के ससुराल अम्हरा, बिहटा में था। पौ फटते ही जसे वीणा को यह मनहूस खबर मिली, बच्चों के साथ रोते-बिलखते ससुराल कुर्ाी , महमदपूर पहुंच गई। जब वह वहां पहुंची तो नजारा देखते ही चुप्पी साध ली। मानो उसके शरीर में जान ही न हो। नवें वर्ग का छात्र व पोता प्रतुल्लय तथा बीए अंतिम वर्ष की छात्रा तथा पाती डिम्पी भी अपने को रोक नहीं पायी।ड्ढr ड्ढr उमेश के आंखों से भी आंसू थमने का नाम नहीं ले रहा था। रविवार की रात अपरािधयों ने तेज हथियार से हमला कर घर के चप्पे-चप्पे को खंगालते हुए परिवार में मौजूद सभी लोगों पर वार किया। घर के मुखिया भोला, उनकी पत्नी सरस्वती की मौत तो घटनास्थल पर ही हो गई और घायल नाती सूर्य कांत ने पीएमसीएच में दम तोड़ दिया। पीएमसीएच में जिन्दगी और मौत से जूझ रहे निशिकांत (10) ने बिलकते हुए बताया कि लगभग दर्जनभर अपराधियों ने घर पर हमला बोल दिया। उसके बाद प्रहार करते हुए जिसको जहां पाया बेदर्दी से मारकर ढेर कर दिया। निशिकांत को फिलहाल इस बात की सूचना नहीं है कि उसका एक भाई सूर्यकांत, उसके नाना भोला सिंह तथा दादी इस दुनिया में नहीं हैं। भोला के दामाद महेश शर्मा तथा बेटी संजू की हालत गंभीर है। दोनों फिलहाल बोलने की हालत में भी नहीं हैं। बारात की तैयारी छोड़ शोक में डूबा गांवड्ढr पटनाफुलवारीशरीफ (हि.प्र. सं.सू.)। रामाकृष्ण शर्मा उर्फ हरिकांत सिंह के बेटे रंजन के तिलक की रस्म पूरी हो रही थी और बारात जाने की तैयारी में घर वालों के साथ ग्रामीण भी लगे थे। इसी बीच वक्त ने अचानक ऐसा करवट बदला कि मंगल गीतों की जगह मातम ने ले ली। जुलाई यानी बुधवार को गांव से रंजन की बारात छपरा जाने वाली है। ऐसे में ग्रामीणों के समक्ष शादी और शहनाई के धुनों की कोई खुशी नहीं। सभी सन्न हैं। बोलना चाहते हैं पर बोल नहीं पाते। ‘काटो तो खून नहीं’ जैसी स्थिति।ड्ढr ड्ढr बोलने से पहले ही कटकटाते लब और रूआंसी आंखे उनके दर्द को बयां कर रही थी। इस बीच कानूनी औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद मृतकों भोला सिंह, उसकी पत्नी और नाती की अंत्येष्टि सैकड़ों नम आंखों की मौजूदगी में गुलबी घाट पर कर दी गई। इधर घटना की खबर जैसे-जैसे फैली गांव में सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ताओं और नेताओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया। सुबह से ही महमदपुर गांव के आसपास के सैकड़ों लोगों की भीड़ घटनास्थल पर जमा थी। विभिन्न दलों के नेताओं द्वारा लोगों को समझाने-बुझाने और दिलासा देने का सिलसिला देर रात तक चला। मौके की नजाकत को भांपते हुए अधिकारियों के नेतृत्व में अतिरिक्त पुलिस बल गांव में कैम्प कर रहा है।

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