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बस! अब और नहीं सहा जाता

वास्थ्य मंत्री भानू प्रताप शाही के क्षेत्र के जरही में दो दलित बच्चे मौत की दुआ मांग रहे हैं। भूख-प्यास से तड़पते इन बच्चों को बीडीओ ने भी ठुकरा दिया। बच्चे चकोर की पत्ती उबाल कर खा रहे हैं। गांव में भीख मांगने के दौरान 13 वर्षीय रिन्ता को हवस का शिकार बनाने का भी प्रयास किया गया। इस बात को लेकर गांववालों ने बैठक कर दोषी युवकों को डांट-डपट कर मामले को सलटा लिया।ड्ढr बच्चे कहते हैं कि उनसे अब और दु:ख सहा नहीं जा रहा है। वे भगवान से बस यही दुआ कर रहे हैं कि उन्हें भी उनके मां-बाप के पास ही भेज दें। दोनों के मां-बाप शोभी राम और उसकी पत्नी मजदूरी कर दो जून की रोटी का इंतजाम करते थे। बाद में दोनों टीबी से पीड़ित हो गये। इलाज न हो पाने के कारण एक वर्ष पूर्व उनकी मौत हो गयी और दर-दर की ठोकरं खाने को बच गयीं उनकी बेटी रिन्ता और 10 वर्षीय बेटा दुर्गेश। मां-बाप का साया सिर से उठने के बाद रिन्ता पढ़ाई छोड़ कर अपनी और भाई की परवरिश के लिए गांव में ही भीख मांगने लगी। अब वह भीख मांगने की बजाय खेतों से चकोर की पत्ती लाती है और उसे उबाल कर दोनों भाई-बहन खा लेते हैं। उनके पास नमक खरीदने के लिए भी पैसे नहीं हैं। उनकी हालत देख उनसे मिलने गये मीडिया के लोगों ने उन्हें 20 किग्रा चावल, कपड़ा, चप्पल और नकद पैसे दिये। ड्ढr ड्ढr ड्ढr

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