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36 घंटे बाद भी नहीं मिटे खून के धब्बे

मंगलवार। समय : दिन के ठीक 12 बजे। फुलवारीशरीफ थानांतर्गत कुर्जी महमदपुर गांव स्थित भोला सिंह का घर। इसी घर के दो कमरों में रविवार की देर रात हैवानों ने खूनी इबारत लिखी थी। घटना के 36 घंटे बाद आलम यह है कि अभी कमरों से लेकर आंगन तक बिखर खून के धब्बों को पोछने का भी किसी को होश नहीं है। जो जीवित हैं उसकी चिंता करं या जो मार गये उनके लिए मातम मनाये। आखिर क्यों और किसने यह खूनी खेल खेला। किसी को कुछ पता नहीं। सभी के जेहन में बार-बार यही सवाल कौंध रहा है कि आखिर निर्दोष मौतों का राज क्या है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री अखिलेश सिंह और लोजपा नेता गुलाम रसूल बलियावी आदि वहां पहुंचे और पीड़ित परिवार को सांत्वना देने में लग गये।ड्ढr ड्ढr करीब एक बजे दिन में मृतकों के श्राद्ध से जुड़े रस्मों के लिए भोला के बेटे उमेश शर्मा हाथ में पीतल का लोटा लिए अपने पुत्र पुंजय और पड़ोसियों के साथ घर से बाहर निकलते हैं। वहीं घर के अंदर एक जर्जर कमर में चूल्हे पर चावल का अधन चढ़ाये भोला की पतोहू वीणा देवी शोक में डूबी है। समीप ही एक छोटी चटाई पर भात रखा हुआ है। बाहर एक पानी भर बाल्टी में कटे आलू के टुकड़े सब्जी के लिए डाले गये हैं। बगल में कुछ बुजुर्ग महिलाएं दाल आदि चुनने में लगी हैं। पूछने पर वीणा ने बताया ‘अंत्येष्टि के बाद दूध भात की औपचारिकता पूरी करने के लिए यह सब हो रहा है।’ पीड़ित परिवार के साथ ही ग्रामीणों के अंदर समाया खौफ अब भी कम नहीं हुआ है। माता-पिता के साथ ही भांजे की हत्या से आहत उमेश ने कहा ‘बहुत डर लगता है। अब बच्चों का पालन-पोषण कैसे होगा। कैसे होगी बेटी की शादी। फिर ऐसी घटना हो सकती है। इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था की जाये। सरकार घोषणा के मुताबिक बेटे पुंजय को नौकरी दे।’ पीड़ित परिवार की गरीबी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि घर के एक कमर को छोड़ किसी में दरवाजा या खिड़की तक नहीं है। जमीन-जायदाद के नाम पर इस परिवार के पास कुछ भी नहीं है। मेहनत-मजदूरी करके किसी तरह गृहस्थी चल रही है। गरीबी के कारण ही भोला के बेटे या अन्य परिजन ज्यादातर ननिहाल में ही रहते हैं।

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