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वनडे को बचाने की कवायद

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद् (आईसीसी) को डर है कि 20-20 का फारमेट वनडे क्रिकेट को नुकसान पहुंचा सकता है सो 50 ओवर के खेल को बचाए रखने की कवायद शुरू की जा रही है। आईसीसी के क्रिकेट जनरल मैनेजर डेव रिचर्डसन ने कहते हैं कि मुझे नहीं पता कि जो भीड़ 20-20 मैच के लिए आ रही है उसे 50 ओवर का मैच देखने में भी वही आनंद आएगा। हो सकता है कि वे 40 ओवर का मैच देखना चाहें या केवल 20 ओवर की दो पारियों तक का जबा रखते हों। लेकिन हमारा ध्येय है कि हम खेल के तीनों फारमेट को बचा कर रखें। टेस्ट क्रिकेट का हम खेल में शीर्ष दर्जा रखना चाहते हैं। पर अब सवाल यह है कि क्या लोग 50 ओवर के मैच को देखना पसंद करेंगे जबकि 20-20 क्रिकेट उन्हें थोड़े समय में वह सब दे रहा हो जो वनडे के खेल में होता है। यह सब वह कम समय में अधिक रोमांचक तरीके से परोस रहा है। एक पत्रिका को दिए इंटरव्यू में डेव रिचर्डसन ने कहा कि 50 ओवर के स्वरूप को बचाए रखना एक चुनौती है। उन्होंने कहा कि हम दो ताजा विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। हमें अभी भी लगता है कि ब्राडकास्टर को सात घंटे का खेल चाहिए। हमें जरूरत है कि इसका बैलेंस बनाए रखें ताकि 50 ओवर का खेल बचा रह सके। रिचर्डसन ने कहा कि 50 ओवर का खेल में अनेक वर्षों से परवान चढ़ा हुआ है। इसमें अनेक तरह के इजाफे हुए हैं। अब इस फारमेट पर नए नए प्रयोग करने के प्रस्ताव आए हैं। क्रिकेटरों में सामान्य रूप से यह मान्यता है कि 50 ओवर के खेल में क्रिकेट की वह शुद्धता नहीं है जोकि टेस्ट क्रिकेट में हैं। यह 60 ओवर के खेल से शुरू हुआ था और इसके बाद 55 ओवर का हुआ और फिर 50 ओवर का। कुछ देश इसके 40 ओवर या 45 ओवर के प्रारूप का आजमा रहे हैं। इसी प्रकार के कुछ नए प्रस्ताव एजेंडे में हैं। इस मसले पर हम कुछ भी वादा नहीं करते। पर यह बात साफ है कि मामला काफी गंभीर है। दक्षिण अफ्रीका के पूर्व विकेटकीपर रिचर्डसन का मानना है कि दुनिया भर में पहले ही बहुत यादा वनडे टूर्नामेंट हैं। वह कहते हैं कि मुझे लगता है कि बहुत से वनडे टूर्नामेंट निरुद्देश्य व निर्थक हैं। वे पैसा तो बना रहे हैं पर उनसे कुछ परिणाम हासिल नहीं हो रहा। यदि विश्व कप के मैच नहीं है तो अन्य मैचों से कोई फर्क नहीं पड़ता। थोड़ी से रैंकिंग सुधर जाती है बस और कुछ नहीं। इसका भी प्रस्ताव है कि इन एकदिवसीय सीरीज के लिए भी कोई संदर्भ तलाशा जाए। 20-20 के लिए रिचर्डसन कहते हैं कि लालच में सोने देने वाली मुर्गी को नहीं मारना चाहिए। उन्होंने कहा कि आईसीसी का मानना है कि टी-20 घरेलू क्रिकेट का रक्षक है। इसे घरेलू स्तर पर छोड़ देना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे सीमित रूप में खेला जाना चाहिए। यह नीति ही बना लेनी चाहिए कि 20-20 केवल घरेलू लीग स्तर पर खेला जाएगा। हम सोने की मुर्गी को नहीं मारना चाहते। रिचर्डसन ने खुलासा किया कि आईसीसी अपनी हालिया कार्यकारी बोर्ड की बैठक में क्रिकेट के भविष्य पर विचार करेगा। इस बैठक में ट्वेंटी-20 की बढ़ती लोकप्रियता और टीमों के प्राइवेट स्वामित्व पर भी बातचीत की जाएगी। पहली बार यह संभव हुआ है कि घरेलू लीग में 20-20 क्रिकेट खेलते हुए पैसा बना है और इसमें दुनिया भर की रुचि जगी है।

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  • Web Title: वनडे को बचाने की कवायद