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सपा ने सौंपा 39 सांसदों का समर्थन पत्र

समाजवादी पार्टी ने आज दोहराया कि एटमी करार राष्ट्रहित में है। हम इसलिए भी संप्रग सरकार का समर्थन कर रहे हैं जिससे सांप्रदायिक ताकतों को दूर रखा जा सके। आडवाणी, मोदी और बसपा की तिकड़ी को दूर रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भाजपा आरोप लगा रही है कि कांग्रेस और सपा के बीच 123 एग्रीमेंट हुआ है। मेर खिलाफ और अमिताभ बच्चन के खिलाफ केस चल रहे हैं। हम दोनों के खिलाफ कोई केस नहीं। मुलायम सिंह के खिलाफ केस के मामले में सुप्रीम कोर्ट हमारी रिव्यू पिटीशन को स्वीकार कर चुकी है। इस बीच कांग्रेस सूत्रों ने बताया है कि कांग्रेस और सपा के बीच दोस्ती की पींगे पिछले साल की गर्मियों में ही बढ़नी शुरू हो गई थी। लेफ्ट से आजिज कांग्रेस सपा को सरकार में 7 मंत्रिपद तक देने को तैयार थी। लेकिन अमर सिंह को पार्टी दूर रखना चाहती थी। यह बात पार्टी को क बूल नहीं हुई। लेकिन इधर, जब लेफ्ट ज्यादा आक्रामक हो उठा, तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रयासों से दोनों दलों के बीच की दूरियां खत्म की गईं। माना जा रहा है कि सपा के गठाोड़ के साथ कांग्रेस सांप्रदायिक ताकतों से राजनीतिक स्तर पर बेहतर ढंग से मुकाबला कर सकेगी। संप्रग सरकार को बचाने की मुहिम के तहत बुधवार को वामदलों द्वारा समर्थन वापसी का पत्र सौंपे जाने के थोड़ी देर बाद ही सपा महासचिव अमर सिंह और संसदीय दल के नेता रामगोपाल यादव ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मुलाकात कर उन्हें 3सांसदों के समर्थन का पत्र सौंप दिया। बाद में संवाददाताओं से बातचीत में सिंह ने कहा कि पार्टी के टिकट पर जीते सभी 3सांसदों के नाम पत्र में दिए गए हैं। सभी सांसद पार्टी के व्हिप से बंधे हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि बालेश्वर यादव भी हमार साथ हैं। वह कल सपा संसदीय दल की बैठक में भी आए थे और उन्होंने सपा के साथ सरकार को समर्थन का आश्वासन दिया है। सिंह ने बताया कि उन्होंने पार्टी से निलंबित सांसद बेनी प्रसाद वर्मा से भी बात की है। उन्होंने खुद के और सांसद अतीक अहमद के वोट का आश्वासन दिया है। अतीक अहमद अभी जेल में हैं। इस प्रकार पार्टी ने अपनी तरफ से सरकार के लिए 40 सांसदों का जुगाड़ कर दिया है। लेकिन दो सांसदों जयप्रकाश रावत और मुनव्वर हसन को लेकर पार्टी अभी तक आश्वास्त नहीं है। वैसे, पार्टी सूत्रों के अनुसार संसदीय दल की बैठक में सांसदों को मनाने की पूरी कोशिश की गई। पार्टी की तरफ से सभी सांसदों को दोबारा टिकट देने का आश्वासन दिया गया है जबकि ये सांसद टिकट नहीं मिलने के कारणों से ही विद्रोही रुख अख्तियार किए हुए हैं। इसके चलते माना जा रहा है कि सभी सांसद पार्टी व्हिप के अनुसार चल सकते हैं।

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