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न सरकार की न एटमी,डील हो तो अपनी!

हम बचे तुम बचे इक दूो के लिए। नई दिल्ली की मौाूदा उठा-पटक के दौर में सबसे यादा सांसदों वाले प्रदेश यूपी में राानीति का यही तराना है। हम यानी सांसद और तुम यानी सरकार को गिराने-बचाने के पाले में खड़ी पार्टियाँ। विश्वास मत की धमक ने सांसदों की हैसियत बढ़ा दी है। पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए एक-एक वोट कीमती है। लिहा सांसद भी खूब मोल-तोल कर रहे हैं। अगले चुनाव का टिकट औरोीत की संभावना उनके लिए यादा बड़ा फैक्टर है। वैसे भी चुनाव क्षेत्रों के नए परिसीमन ने कई की मौाूदा सीटों का भूगोल बदल दिया है। कई सुरक्षित सीटें सामान्य हो गईं हैं तो सामान्य सीटें सुरक्षित। यहाँ के सिटिंग सांसदों को अगले चुनाव मेंोीत की गारंटी वाली सीट नहीं मिल रही। पार्टी टिकट काटने पर आमादा है। एसे सांसदों के लिए तय समय पर चुनाव बेहतर विकल्प है।ड्ढr इन्हें यह बेहतर विकल्प लग रहा है कि फिलहाल सरकार न गिर और चुनाव तब होंोब अगली लोकसभा के लिए उनकी सीट सुरक्षित होोाए। सरकार गिरने पर लोकसभा भंग होने को लेकर आशंकित एसे सांसद सत्ता पक्ष और उसके लिए वोट कीोुगाड़ मेंोुटे मैनेारों की बड़ी उम्मीद हैं। वहीं एसे सांसद भी हैंोिनके लिएोीत की अधिकतम गारंटी वाली सीट एटमी करार या सरकार के रहने-ााने से कहीं यादा मायने रखती है।ोो यह गारंटी दे सके ये उनके साथोाने से कोई गुरा नहीं करंगे। गए कुछ दिनों से पाल-बदल की गतिविधियाँ और खबरं यूँ ही नहीं हैं। अभी कुछ चौंकाने वाले पाला-बदल दिखाई-सुनाई दें तो आश्चर्य नहीं। यूपी के संसदीय क्षेत्रों मेंोो गुणा-भाग चल रहा है वह एटमी करार से कहीं यादाोटिल है।ड्ढr सांसदों के लिए यादाोरूरी लोकसभा के अगले चुनाव मेंोीत की गारंटी हासिल करना है। इनके लिए न सरकार फैक्टर है और न करार।ोिन्हें डील विरोधी की टिकट पर खुद कीोीत का भरोसा है उन्हें पाला बदलने से हिचक नहीं। वहीं डील समर्थकों के टिकट परोिन्हेंोीत की संभावना यादा लग रही है वे भी पीछे नहीं। सपा के दो सांसदों के लिए नेतृत्व का ‘त्याग’ यूँ ही नहीं है। शफीकुर्रहमान बर्क को मुरादाबाद कीोगह सम्भल से टिकट देने का भरोसा और सलीम शेरवानी को बदायूँ से ही लड़ाने की घोषणा सांसदों की बदली प्राथमिकताओं यानीोीत की गारंटी का ही नतीाा मानाोा रहा है। चूँकि सांसद डिमांड में है लिहा पार्टियाँ भी सतर्क हैं। महा विश्वास मत के लिए वोट पाने की गांरटी पर टिकट का वायदा तभी हो रहा हैोब अगले के चुनावी बोझ न साबित होने की गारंटी भी हो।

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