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राष्ट्रीय आय में असंगठित क्षेत्र का काफी योगदान

देश में असंगठित क्षेत्र काफी व्यापक है। राष्ट्रीय आय में असंगठित क्षेत्र का काफी योगदान है। इस क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिक अनेक समस्याओं से ग्रस्त हैं। स्थानीय रोगार के अभाव में बड़ी संख्या में इन्हें अन्य राज्यों में रोगार की तलाश में प्रत्येक वर्ष मजबूरी में जाना पड़ता है जहां उनका शोषण होता है। उन्हें प्रताड़ित किया जाता है और उनकी हत्या तथा लूट भी की जाती है। उक्त बातें केन्द्रीय योजना आयोग के बिहार विशेष कार्यबल के अध्यक्ष डा. एस.सी. झा ने बुधवार को बिहार आर्थिक अध्ययन संस्थान के तत्वावधान में आयोजित एक सेमिनार में कहीं। विषय था ‘बिहार के ग्रामीण क्षेत्रोंे से पलायित प्रबर्जित श्रमिकों के सामाजिक आर्थिक पहलू’।ड्ढr ड्ढr सेमिनार की अध्यक्षता पूर्व मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्रा ने की। डा. मिश्रा ने कहा कि विकास के अभाव में यहां रोगार के अवसर उस अनुपात में नहीं बढ़े हैं जिस हिसाब से बेरोगार की फौा बढ़ी है। परिणाम स्वरूप रोगार की तलाश में बिहार के लाखों लोग दूसर प्रदेशों में जाने को मजबूर हो रहे हैं। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग के पूर्व अध्यक्ष डा. टी. हक ने कहा कि असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों की दुर्दशा ने स्वतंत्रता से अबतक सभी सरकारों का ध्यान आकर्षित किया है। पटना विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डा. एन.के. चौधरी ने कहा कि इन असंगठित क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए पारिश्रमिक की अपेक्षा उसको मजदूरी कम दी जाती है जो निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम है। इस मौके पर एफइएस, नई दिल्ली के डा. प्रवीण सिन्हा डा. प्यार लाल, डा. एस.पी. अहुाा, डा. पी.एन. झा, डा. कुमकुम नारायण एवं डा. मिरा वर्मा सहित कई लोग उपस्थित थे। डा. दुर्गानंद झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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